सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था को थाने के कर्मचारी ही स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। वजह है, एक थाना प्रभारी के अतिरिक्त जो तीन अन्य अतिरिक्त इंस्पेक्टर हैं, उन्हें भी उसी स्टाफ से काम लेना पड़ रहा है।
ऐसे में कहीं मुंशी के न सुनने की तो कहीं सिपाही व दरोगा के न सुनने की शिकायतें आ रही हैं। वहीं, जिलों के पुलिस प्रभारियों को भी इस व्यवस्था को बनाए रखने में अधिक मशक्कत करनी पड़ रही है।