राज्यपाल द्वारा अध्यादेश को मंजूरी देने के बाद प्रदेश में प्लास्टिक व थर्माकोल से बनी सामग्रियों का प्रयोग दंडनीय अपराध हो जाएगा। अध्यादेश के मुताबिक जैविक रूप से नष्ट नहीं होने वाले 50 माइक्रॉन से कम के प्लास्टिक के थैले, पॉलिथीन, नायलॉन, पीबीसी, पॉली प्रोपाइलिंग, पॉलीस्ट्रिन एवं थर्माकोल से बने ग्लास, प्लेट, थाली, कटोरी का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।
इन सामग्रियों का निर्माण, वितरण, विक्रय, भंडारण, पैकेजिंग, परिवहन, आयात व निर्यात समेत सभी तरह के क्रियाकलापों पर प्रतिबंध रहेगा। नगर विकास विभाग ने सभी डीएम व नगर निकायों को प्रतिबंधित सामग्री के भंडारण, निर्माण, वितरण के खिलाफ सोमवार से छापेमारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग मनोज कुमार सिंह ने बताया सभी निकायों को अध्यादेश के प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराने को कहा गया है। जिला प्रशासन, नगरीय निकाय, पुलिस व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीमें छापेमारी करेगी और मौके पर जुर्माना भी वसूलेगी।
प्रदेश भर में रविवार से पॉलिथीन व प्लास्टिक से बने उत्पादों के प्रयोग को प्रतिबंधित तो कर दिया गया था, लेकिन इसके खिलाफ जारी अभियान फीका रहा। जो अभियान चले वह सिर्फ नगर निकायों के स्तर पर ही रहा। जिला व पुलिस प्रशासन अभियान से दूर ही रहा।
नतीजा यह हुआ कि फल व सब्जी मंडियों के अलावा अन्य दुकानों पर प्लास्टिक के थैलों का प्रयोग पहले की तरह ही हुआ। हालांकि प्रमुख सचिव नगर विकास का दावा है कि अभियान का काफी सार्थक परिणाम सामने आया है। सोमवार को अभियान को और सख्ती से चलाया जाएगा।