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बैन के बाद प्लास्टिक के इस्तेमाल पर देना होगा एक लाख का जुर्माना, छापेमारी आज से

Mon, 16 Jul 2018 01:06 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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‘उप्र. प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा कचरा (उपयोग और निस्तारण का विनियमन) (संशोधन) अध्यादेश-2018’ में सजा के प्रावधानों को और कठोर बनाया गया है। इसमें प्रतिबंधित सामग्री का प्रयोग करने वालों की तुलना में कारोबार करने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।

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अध्यादेश में पॉलिथीन या प्लास्टिक की सामग्री के प्रयोग पर प्रतिबंध का पहली बार उल्लंघन पर एक माह की सजा या न्यूनतम एक हजार और अधिकतम 10 हजार रुपये तक जुर्माना देना होगा। दूसरी बार के उल्लंघन पर छह माह की जेल या न्यूनतम 5 हजार व अधिकतम 20 हजार रुपये तक जुर्माना देना होगा।

इसी तरह  प्लास्टिक के कैरीबैग के विक्रय, वितरण, उत्पादन, भंडारण और परिवहन पर लगे प्रतिबंध का पहली उल्लंघन करने पर छह माह की जेल या न्यूनतम 10 हजार व अधिकतम 50 हजार तक का जुर्माना देना होगा। दूसरी बार उल्लंघन पर एक वर्ष तक की सजा एवं न्यूनतम 10 हजार व अधिकतम एक लाख रुपये तक का जुर्माना देना होगा।

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निर्माण व भंडारण के खिलाफ छापेमारी आज से

राज्यपाल द्वारा अध्यादेश को मंजूरी देने के बाद प्रदेश में प्लास्टिक व थर्माकोल से बनी सामग्रियों का प्रयोग दंडनीय अपराध हो जाएगा। अध्यादेश के मुताबिक जैविक रूप से नष्ट नहीं होने वाले 50 माइक्रॉन से कम के प्लास्टिक के थैले, पॉलिथीन, नायलॉन, पीबीसी, पॉली प्रोपाइलिंग, पॉलीस्ट्रिन एवं थर्माकोल से बने ग्लास, प्लेट, थाली, कटोरी का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा।

इन सामग्रियों का निर्माण, वितरण, विक्रय, भंडारण, पैकेजिंग, परिवहन, आयात व निर्यात समेत सभी तरह के क्रियाकलापों पर प्रतिबंध रहेगा। नगर विकास विभाग ने सभी डीएम व नगर निकायों को प्रतिबंधित सामग्री के भंडारण, निर्माण, वितरण के खिलाफ सोमवार से छापेमारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग मनोज कुमार सिंह ने बताया सभी निकायों को अध्यादेश के प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराने को कहा गया है। जिला प्रशासन, नगरीय निकाय, पुलिस व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीमें छापेमारी करेगी और मौके पर जुर्माना भी वसूलेगी।
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फीका रहा प्लास्टिक के खिलाफ चल रहा अभियान

प्रदेश भर में रविवार से पॉलिथीन व प्लास्टिक से बने उत्पादों के प्रयोग को प्रतिबंधित तो कर दिया गया था, लेकिन इसके खिलाफ जारी अभियान फीका रहा। जो अभियान चले वह सिर्फ नगर निकायों के स्तर पर ही रहा। जिला व पुलिस प्रशासन अभियान से दूर ही रहा।

नतीजा यह हुआ कि फल व सब्जी मंडियों के अलावा अन्य दुकानों पर प्लास्टिक के थैलों का प्रयोग पहले की तरह ही हुआ। हालांकि प्रमुख सचिव नगर विकास का दावा है कि अभियान का काफी सार्थक परिणाम सामने आया है। सोमवार को अभियान को और सख्ती से चलाया जाएगा।
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