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12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म मामले की जांच एक महीने में पूरी करने के आदेश

Wed, 25 Apr 2018 02:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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डीजीपी ओम प्रकाश सिंह - फोटो : SELF
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12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ घटित दुष्कर्म, दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में अब एक माह के भीतर विवेचना पूरी कर आारोप पत्र दाखिल करना होगा। केंद्र सरकार द्वारा क्रिमनल लॉ संशोधन अध्यादेश लाने के बाद डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने नई धाराओं के बारे में फील्ड के अफसरों को सर्कुलर जारी किया है।
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डीआईजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार ने मंगलवार को बताया कि भारत सरकार ने 12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ घटित दुष्कर्म, दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में  21 अप्रैल को क्रिमनल लॉ (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस में संशोधन किया है। इसमें धारा 376 ए, बी, 376 डी, ए और 376 डी, बी बढ़ाई गई है। 

उन्होंने बताया कि 376 ए,बी के तहत किसी 12 वर्ष से कम उम्र की बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म के लिए  दोषी को न्यूनतम 20 वर्ष की सजा या उम्रकैद या मृत्युदंड तक दिया जा सकता है।
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धारा 376 डी, ए में 16 वर्ष से कम उम्र की बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म के लिए दोषियों को उम्रकैद की सजा होगी जबकि धारा 376 डी, बी में  12 वर्ष से कम उम्र की बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म के लिए उम्रकैद या मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है>
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प्रतिदिन हो सुनवाई

डीआईजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार - फोटो : डेमो
डीजीपी ने कहा कि 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ अपराध के मामले में संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराकर जोनल एडीजी से लेकर सीओ तक के अधिकारी तत्काल मौके का निरीक्षण करेंगे और विवेचक को दिशा निर्देश देंगे।

ऐसे मामलों में वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल की फोटो, वीडियोग्राफी कराते हुए साक्ष्य एकत्र करें। पीड़िता के चिकित्सकीय परीक्षण के साथ डीएनए प्रोफाइलिंग भी कराई जाए। इसके अलावा पीड़िता की पहचान छिपाते हुए धारा 161 और 164 में बयान दर्ज कराकर कोशिश की जाए कि एक माह के भीतर विवेचना पूरी कर आरोप पत्र भेज दिया जाए।

डीजीपी ने कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता को विभिन्न योजनाओं में आर्थिक मदद दी जाती है। रानी लक्ष्मीबाई योजना में तीन लाख, पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना में तीन लाख, अनुसूचित जाति जनजाति की पीड़िता को पांच लाख और सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में सवा आठ लाख रुपये दिए जाते हैं। पीड़िता एवं उसके परिवार को दी जाने वाली इस राजकीय सहायता के लिए सभी कार्रवाई समय से सुनिश्चित कराई जाए।

डीजीपी की ओर से कहा गया है कि कई मामलों में गवाहों के मुकर जाने की आशंका होती है। ऐसे में पुलिस कप्तान और जिलाधिकारी जिला जज से समन्वय स्थापित कर इस प्रकार के मुकदमों की धारा 309 के अनुरूप दिन-प्रतिदिन सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए अनुरोध करें।
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