पीसीएस-2015 के टॉपरों की कॉपियां दोबारा जांची जाएंगी। मॉडरेशन की आड़ में नंबर घटाए-बढ़ाए जाने के ठोस सुबूत मिलने के बाद सीबीआई अब लाल पेन से तैयार किया गया पीसीएस-2015 का चक्रव्यूह तोड़ने के करीब है।
मॉडरेशन की आड़ में कॉपियों पर चले लाल पेन ने सैकड़ों मेधावियों को मेरिट से बाहर कर दिया तो नंबर बढ़ने पर मेरिट से बाहर हो रहे कई अभ्यर्थियों को फायदा मिला और उनका चयन हो गया। इनमें से कुछ तो टॉप ट्वेंटी में भी शामिल हुए।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई ने जब मॉडरेशन प्रक्रिया को खंगालना शुरू किया था तो किसी को भी अंदाज नहीं था कि इसकी आड़ में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी हुई होगी।
मॉडरेशन की आड़ में नंबर घटाए और बढ़ाए गए, लेकिन इसके लिए कोई मानक नहीं अपनाया गया। सूत्रों के मुताबिक नंबर घटाने और बढ़ाने में लाल पेन का उपयोग किया गया। कॉपियों में मॉडरेटर के हस्ताक्षर भी हैं, लेकिन हस्ताक्षर इतने आड़े-तिरछे हैं कि किसी के लिए भी हस्ताक्षर के आधार पर नाम का पता लगा पाना मुमकिन नहीं है। आयोग पहले ही सीबीआई को मॉडरेटर का नाम बताने से इनकार कर चुका है।