कार्यक्रम में शामिल डिप्टी सीएम।
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मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं किसी एक देश, समाज अथवा समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। भगवान बुद्ध ने मानव जीवन में करुणा, सदाचार, संयम, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान को सर्वोच्च महत्व दिया। उनके विचारों को अपनाकर ही विश्व में स्थायी शांति, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिल रही है। भारत विश्व समुदाय के साथ अपने प्राचीन ज्ञान, संस्कृति और जीवन मूल्यों को साझा करते हुए शांति एवं मानव कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा का पावन पर्व भगवान बुद्ध के महान संदेशों को स्मरण करने तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिवस हमें सत्य, करुणा, अहिंसा, मैत्री और मानव सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से भगवान बुद्ध के उपदेशों को अपने आचरण में उतारते हुए समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को और अधिक मजबूत करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिम्पोचे, केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के कुलपति डॉ. वांगचुक दोरजी नेगी, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर, भारत-श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष डॉ. के. सिरी सुमेधा थेरो, सम्मानित भिक्षुगण तथा अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।