उप नगर आयुक्त संतोष यादव को 408 दिन की प्रतीक्षा अवधि (नगर निगम में तैनाती नहीं) का वेतन दिया जाना था। इसको लेकर कार्यवाही चल रही थी। इसी बीच सचिव कानपुर विकास प्राधिकरण का पत्र नगर निगम पहुंचा, जिसमें उप नगर आयुक्त पर 3.29 लाख रुपये किराया बकाया होने का उल्लेख किया गया।
उस संबंध में लिपिक रमेश ने उप नगर आयुक्त से फोन पर बात की थी। बकाया किराए की कटौती की आशंका को लेकर उप नगर आयुक्त भड़क गए थे और फोन पर गाली-गलौज शुरू कर दी थी।
शुरू से चर्चा में रहे संतोष
छह महीने पहले जब शासन ने उप नगर आयुक्त संतोष यादव को नगर निगम में तैनात किया था तो उस समय उनको नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी की ओर से जोनल अधिकारी की जिम्मेदारी दी जा रही थी, मगर वह ज्वाइनिंग के बाद लंबी छुट्टी पर चले गए।
लौटे तो कर अधीक्षक नरेंद्र वर्मा का तबादला होने के बाद प्रचार विभाग का काम दिया गया। नगर निगम में आने से पहले उनका कई जगह तबादला हुआ, लेकिन वह गए नहीं। इस दौरान 408 दिन वेटिंग में रहे। अब उसी का वेतन उनको नगर निगम से दिया जाना है।