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Liver Problem: लिवर की गंभीर समस्याओं की वजह बन रहा तनाव, आंतों का मूवमेंट हो रहा प्रभावित

Mon, 02 Oct 2023 09:14 AM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ

सार

शराब और गुटखा का सेवन करने वालों में लिवर का कैंसर पहले भी निकलता था, लेकिन अब इनका सेवन न करने वालों को भी यह समस्या हो रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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तनाव की वजह से सिर्फ बीपी और डायबिटीज ही नहीं लिवर की गंभीर बीमारियां भी हो रही हैं। केजीएमयू के गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रुंगटा ने बताया कि विभाग की ओपीडी में आने वाले लिवर के मरीजों में से करीब 80 फीसदी की वजह तनाव होता है। वे इंडियन सोसायटी ऑफ गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी की ओर से हजरतगंज के एक होटल में आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे।

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डॉ. रुंगटा के अनुसार तनाव की वजह से मरीजों की आंतों का मूवमेंट प्रभावित हो रहा है, वे कब्ज के रोगी बन रहे हैं। कब्ज की समस्या की वजह से लिवर की समस्याएं शुरू होती हैं। ज्यादा गंभीर समस्या होने पर लिवर खराब हो जाता है। समस्या के लिए दूसरी सबसे बड़ी वजह फैटी लिवर है। उनके अनुसार यह महामारी का रूप ले रही है। 80 से 90 फीसदी तक लोग इसके शिकार हैं। इसकी चपेट में वे लोग भी हैं जो शराब आदि का सेवन नहीं करते हैं। लंबे समय तक फैटी लिवर का शिकार मरीज लिवर सिरोसिस का शिकार हो जाता है।

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शराब और गुटखा का सेवन करने वालों में लिवर का कैंसर पहले भी निकलता था, लेकिन अब इनका सेवन न करने वालों को भी यह समस्या हो रही है। डॉ. पुनीत मेहरोत्रा ने बताया कि बहुत से बच्चे आजकल टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना खाते हैं। यह भी पेट की बीमारियों की बड़ी वजह है। उन्होंने वजन कम करने के लिए चिकना और तला-भुना खाने के साथ ही मीठे से परहेज करने की भी सलाह दी। उनके अनुसार ऑयल व कार्बोहाइड्रेट भी पेट की जरूरत है, इसलिए इसे बिल्कुल बंद नहीं करना चाहिए।

पेट के लाखों रोगी, डॉक्टर सिर्फ 200
डॉ. सुमित रुंगटा ने बताया कि पेट के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। केजीएमयू जैसे संस्थान में ही रोजाना 400 से ज्यादा मरीज गैस्ट्रो मेडिसिन की ओपीडी में आते हैं। पूरे प्रदेश की बात करें तो इनकी कुल संख्या लाखों में होगी। इसके बावजूद इसके विशेषज्ञ काफी कम हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मिलाकर 200 डॉक्टर ही गैस्ट्रो मेडिसिन के विशेषज्ञ हैं। सरकारी अस्पताल के साथ ही निजी क्षेत्र में भी इनका अभाव है।

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