प्रतिबंधित जाल से मछली का शिकार करते मछुवारे।
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जमुनहा (श्रावस्ती)। मत्स्य विभाग लाखों रुपये खर्च कर राप्ती नदी सहित नहरों में मत्स्य बीज डलवा रहा है। जबकि शिकारी प्रतिबंधित जाल लगा कर मछलियों का शिकार कर रहे हैं। ध्यान न देने से शिकारियों के हौसले बुलंद हैं।
मत्स्य पालन विभाग प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च कर विभिन्न प्रजातियों के मत्स्य बीज राप्ती नदी सहित नहरों में डाल रहा है। वहीं लाखों रुपये अनुदान देकर मत्स्य पालकों को मछली पालने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। इसके बावजूद उनकी सुरक्षा व संरक्षा का कोई इंतजाम न होने का लाभ मछुआरे उठा रहे हैं। जो प्रतिबंधित जाल लगा कर राप्ती नदी सहित नहरों में मछलियों का शिकार कर रहे हैं। शिकारी बड़ी मछली ही नहीं मत्स्य बीज को भी फंसा कर निकाल लेते हैं और सुखाकर उसका उपयोग करते हैं। इससे जहां एक तरफ लाखों मत्स्य बीज नष्ट हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इससे उठने वाली बदबू से लोगों का चलना दूभर है। ऐसा ही कुछ सोमवार को भकला नाला में देखने को मिला। जहां मछुआरे प्रतिबंधित जाल से मछलियों का शिकार कर रहे थे।
विभागीय कर्मियों की शह पर हो रहा शिकार
जमुनहा क्षेत्र में स्थित नहर व राप्ती नदी सहित भकला नाला में खुले आम मछलियों का शिकार किया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक सिंचाई विभाग के कर्मचारी इन शिकारियों से लाभ लेकर उन्हें आखेट की अनुमति दे रहे हैं। ऐसे में जहां इन नदी-नालों में मत्स्य बीज का संकट हो रहा है। वहीं शासन की मंशा भी पूरी नहीं हो रही है।
भकला नाले में कई बार दिखे घड़ियाल, बेखौफ है शिकारी
जिले में मौजूद मुख्य सरयू योजक नहर सहित राप्ती नदी व भकला नाले में पूर्व में कई बार घड़ियाल देखे जा चुके हैं पर मछुआरे बेखौफ नदी व नहर से मछलियों का शिकार कर रहे हैं। कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं।
एसडीएम जमुनहा व सहायक निदेशक मत्स्य को मौके पर भेज कर इसकी जांच कराई जाएगी। यदि ऐसा है तो शिकारियों पर कार्रवाई होगी। - अमरेंद्र कुमार वर्मा एडीएम