श्रावस्ती। तराई में मौसम की मार लोगों को बीमार बना रही है। खानपान पर नियंत्रण न होने व चिलचिलाती धूप, लू व गर्म हवा के बीच सफर से लोग अपच सहित अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हें। दिन में लगातार चल रही धूल भरी गर्म हवा लोगों में डिहाइड्रेशन, अपच, अतिसार, डायरिया, पेचिश, बुखार व लू लगने का खतरा बढ़ा रही है। अस्पताल आने वाले ज्यादातर मरीज इन्हीं बीमारियों से ग्रसित हैं। इससे बचने के लिए आयुर्वेद चिकित्सक एहतियात बरतने के साथ घरेलू उपचार की सलाह दे रहे हैं।
इनका करें सेवन तो कम होगा खतरा
शरीर में पानी की कमी न होने दें, सुपाच्य भोजन करें। लघु आहार के साथ ही संभव हो तो उपवास रखें। नींबू, पानी व चीनी का घोल बनाकर उसका सेवन करें। जहां तक संभव हो धूप में घर से निकलने से परहेज करें। खाली पेट कदापि न जाएं। कुछ न कुछ खाते-पीते रहें। यदि धूप व लू में कहीं जाना पड़े तो दो से तीन बार संतरा, तरबूज, खीरा अथवा नारियल पानी का सेवन करें। डिहाइड्रेशन होने पर उपवास रखें। इलेक्ट्रॉल अथवा ओआरएस का सेवन करें।
अपनाएं घरेलू उपचार
यदि डिहाइड्रेशन हो तो उपवास रखें। वायरल इंफेक्शन 12 से 24 दिन में सही हो जाता है। लेकिन पानी की कमी का असर किडनी पर पड़ता है। इसलिए गरिष्ठ भोजन से बचें। यदि पेट दर्द, ऐंठन या पेट फूलने या फिर पेचिश, ज्वर हो तो अजवाइन, हींग व काला नमक का चूर्ण बनाकर गुनगुने पानी से सेवन करें। यदि फायदा न हो तो तत्काल चिकित्सक की सलाह लें। - डाॅ. नसरीन खातून, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भिनगा