भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अधिगृहीत भूमि का मुआवजा दिए बिना फसल नष्ट नहीं करने, गन्ना मूल्य बढ़ाने और बकाया भुगतान दिलाने, किसानों को सस्ती बिजली देने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने मांग की कि फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हो, इसके लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं।
भाकियू का प्रतिनिधिमंडल चौ. राकेश सिंह टिकैत के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिलने कालिदास मार्ग स्थित उनके आवास पर पहुंचा। वार्ता में बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की शीघ्र भुगतान कराने, आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य बढ़ाने, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार किसानों को मुआवजा न दिए जाने व बिना मुआवजा दिए किसानों की तैयार फसलों को नष्ट किए जाने के मुद्दे् उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित किए गए तीन कृषि विधेयकों के साथ-साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एसएमपी) के लिए भी कानून बनाया जाए। इसकी अनुशंसा केंद्र से की जाए। मंडी के बाहर किसान के खेत को छोड़कर अन्य स्थानों से खरीद पर भी मंडी शुल्क लगाया जाए।
वार्ता के बाद राकेश टिकैत ने मीडियाकर्मियों से कहा कि मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि किसी किसान की फसल नहीं उजाड़ी जाएगी। अधिगृहीत जमीन पर कब्जा लेने से पहले किसान को फसल काटने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। उन्होंने नए पेराई सीजन से पहले बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराने तथा प्रदेश में एमएसपी से कम रेट पर खरीद नहीं होने का भी भरोसा दिया है। भाकियू के प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंह चौहान व मैनपाल सिंह चौहान, प्रदेश उपाध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा व बरेली मंडल अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह शामिल रहे।
भाकियू ने ये मांगें उठाईं
उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद पिछले दो वर्षों से गन्ना मूल्य न बढ़ने से किसानों को घाटा हो रहा है। आगामी सत्र में गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
आपूर्ति के 14 दिन के भीतर गन्ना मूल्य भुगतान न करने पर किसानों का लंबित अवधि का ब्याज समेत अविलंब भुगतान कराया जाए।
गन्ना खरीद नीति में बदलाव न किया जाए।
सामान्य योजना के स्वीकृत नलकूप कनेक्शन का सामान दिए जाने के लिए अविलंब लक्ष्य जारी किया जाए।
डार्क जोन में अनियमित रूप से चलाए जा रहे निजी नलकूप के कनेक्शन नियमित करने केलिए तीन माह का और समय दिया जाए।
बिजली विभाग की गलती के कारण हजारों ग्रामीण उपभोक्ता बिल संशोधन के लिए चक्कर लगाते रहते हैं। गलत बिल भेजने वालों पर कार्रवाई की जाए।
किसानों के बिजली बिल की दरें कम की जाएं।
किसान सम्मान निधि का लाभ प्रदेश के सभी किसानों को दिया जाए। इसकी राशि बढ़ाकर 12 हजार रुपये सालाना की जाए।
किसान ऋण मोचन योजना के तहत पात्र लंबित प्रार्थना पत्रों का निस्तारण कर किसानों की राशि जारी की जाए।
भूमि अधिग्रहण अवार्ड में कानून के विरुद्ध फसल का मुआवजा दिए बिना मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, मिर्जापुर, सहारनपुर, शामली जिलों में किसानों की तैयार फसल नष्ट कर दी गई है। किसानों को नष्ट की गई फसलों का मुआवजा दिलाया जाए।
कृषि रसायन व यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
जंगली जानवरों व अन्ना प्रथा से किसानों को राहत दी जाए। गोशालाओं का संचालन सुचारु किया जाए।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार किसानों को पराली/गन्ना पत्ती के निस्तारण के लिए 3000 रुपये प्रति एकड़ दिया जाए।
कंबाइन से स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) लगाए जाने की बाध्यता समाप्त की जाए।