प्रेस क्लब में समता सम्मेलन में शामिल लोग।
लखनऊ। उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव के खिलाफ सख्त और प्रभावी नियामक व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी की ओर से प्रेस क्लब में समता सम्मेलन का आयोजन किया गया। लखनऊ विवि के प्रो. डॉ. रविकांत चंदन ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव गंभीर संरचनात्मक समस्या है।
उन्होंने कहा कि इसे लंबे समय तक व्यक्तिगत घटनाओं के रूप में पेश किया गया, जबकि वास्तविकता है कि यह संस्थागत ढांचे में मौजूद असमानताओं से पैदा होता है। छात्र संगठन आइसा की केंद्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा कि देश के कई विश्वविद्यालयों में दलित, बहुजन और वंचित तबकों के छात्रों को आज भी अपमान, अलगाव और संस्थागत हिंसा का सामना करना पड़ता है। आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि कैंपसों में दलित-बहुजन छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन संस्थागत स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया बेहद कमजोर है। सम्मेलन में वक्ताओं ने मांग की कि विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र और पारदर्शी एंटी-डिस्क्रिमिनेशन तंत्र, समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था, नियमित सामाजिक ऑडिट और स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
प्रेस क्लब में समता सम्मेलन में शामिल लोग।
प्रेस क्लब में समता सम्मेलन में शामिल लोग।
प्रेस क्लब में समता सम्मेलन में शामिल लोग।
प्रेस क्लब में समता सम्मेलन में शामिल लोग।
प्रेस क्लब में समता सम्मेलन में शामिल लोग।
प्रेस क्लब में समता सम्मेलन में शामिल लोग।
प्रेस क्लब में समता सम्मेलन में शामिल लोग।