अप्रशिक्षित दाई से प्रसव कराने से नवजात जिदंगी भर के लिए मिर्गी का मरीज बन सकता है। इसलिए प्रसव हमेशा स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में कराना चाहिए।
यह बात मिर्गी जागरूकता दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को केजीएमयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. राजेश वर्मा ने कही। उन्होंने बताया कि अप्रशिक्षित दाई से प्रसव कराने के दौरान कई बार नवजात के दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है।
इससे उस बच्चे के दिमाग का वह हिस्सा जहां ऑक्सीजन नहीं पहुंचा, वह क्षतिग्रस्त हो जाता है। ऐसे में आगे चलकर बच्चे को मिर्गी का दौरा पड़ता है।
अनुवांशिक भी हो सकती है बीमारी
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02 तरह के होते हैं मिर्गी के दौरे, एक शरीर के किसी एक हिस्से में होता है, जबकि दूसरे प्रकार का दौरा पूरे शरीर में एक साथ आता है।
03 से 05 मिनट होती हो सकता है दौरा। दौरे के समय मुंह से झाग आता है। बदन नीला पड़ जाता है।
95 प्रतिशत मरीज दौरे के बाद खुद ही ठीक हो जाता है।
10 मिनट से ज्यादा दौरा आये तो विशेषज्ञ को दिखाएं
पूरे विश्व की 01 फीसदी आबादी बीमारी की चपेट में है
प्रो. राजेश वर्मा की मानें तो कुछ मामलों में मिर्गी की बीमारी अनुवांशिक होती है, लेकिन उसका भी इलाज संभव है। उन्होंने बताया कि कई बार लड़कियों की शादी दौरा पड़ने की वजह से नहीं हो पाती है।
न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है मिर्गी
डॉ राजेश वर्मा
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यदि हो भी जाये तो पारिवारिक जीवन में तनाव आ जाता है। ऐसे मामलों में घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि इलाज की आवश्यकता होती है। प्रो. राजेश ने बताया कि मिर्गी के अन्य कारण हो सकते हैं।
2 से 5 वर्ष तक के बच्चों में बुखार प्रमुख कारण होता है। इसमेें बच्चों को दौरे पड़ते हैं। 80 से 90 प्रतिशत मामलों में बुखार ठीक हो जाने पर दौरे भी ठीक हो जाते हैं। 100 में से छह बच्चों में इस तरह की समस्या देखी गई।
प्रो. राजेश वर्मा ने बताया कि मिर्गी का रोग एक सामान्य बीमारी है। पूरे विश्व की एक प्रतिशत आबादी इस बीमारी की चपेट में है। बदलती जीवनशैली के कारण यह रोग तेजी से फैल रहा है।
इस बीमारी में बार-बार दौरे आते हैं। यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। एक दिन के बच्चे से लेकर सौ साल के बुजुर्ग तक को मिर्गी हो सकती है।