प्राधिकरण में आदेश का एक महीना बीतने के बावजूद ई-टेंडरिंग का काम एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका है।
यहां 25 लाख रुपये से ऊपर के कामों के लिए दिए जाने वाले टेंडर में पारदर्शिता लागू करने के लिए ऑनलाइन निविदा किए जाने की यह व्यवस्था शुरू की जानी थी।
मगर अभी तक ठेकेदारों के ई-सिग्नेचर लेने के लिए नोटिफिकेशन तक नहीं किया गया है।
जानकारों का कहना है कि मैनेज करके टेंडर हासिल करने वाले रसूखदार ठेकेदारों की हनक के चलते प्राधिकरण के अधिकारी इस व्यवस्था को लागू नहीं करना चाहते ताकि इंजीनियर और ठेकेदारों की मिलीभगत से टेंडरों की बंदरबांट जारी रहे।
एलडीए के उपाध्यक्ष अष्टभुजा प्रसाद तिवारी ने एक महीना पहले एलडीए में ई-टेंडरिंग लागू करने की घोषणा की थी। इस आशय का विभागीय आदेश सात सितंबर को जारी कर दिया गया था।
सिस्टम मैनेजर प्रदीप भटनागर को इसका नोडल आफिसर बनाया गया था। सूत्रों के अनुसार प्राधिकरण में ठेकेदारों का सिंडिकेट टेंडर मैनेज करता है। एक निविदा के लिए तीन प्रस्ताव किए जाते हैं।
जिसमें से न्यूनतम को ठेका मिल जाता है। इस वजह से नए ठेकेदार ठेका नहीं डाल पाते हैं।