रक्षामंत्री राजनाथ ने कहा कि जब हम भगवान श्रीराम के चरित्र को पढ़ते हैं। रामायण, श्रीरामचरितमानस या रामकथा के अन्य प्रसंगों को समझते हैं तो एक बात बार-बार सामने आती है कि जब-जब इस धरती पर ऋषियों ने धर्म की स्थापना का प्रयास किया, तब-तब कुछ आसुरी शक्तियां आईं और उस यज्ञ को भंग करने का प्रयास किया।
राजनाथ ने कहा, यही इतिहास है, यही सत्य भी है। वैसा ही दृश्य हमने अपने जीवनकाल में भी देखा। जब रथयात्रा शुरू हुई और अयोध्या से लेकर पूरे भारत के संत, महंत, वैरागी और कारसेवक एक स्वर में खड़े हुए तब उन पर भी वही आसुरी शक्तियां टूट पड़ीं। मैं खुद भी उन तमाम घटनाओं का साक्षी रहा हूं। गोलियां चलीं, लाठियां बरसीं, रास्ते रोके गए और प्रभु श्रीराम का नाम लेने वालों को अपराधी घोषित करने तक का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा, हमने प्रभु श्रीराम से ही सीखा है कि समय सबका न्याय करता है। जिसने राम का साथ दिया, जिसने रामराज्य का साथ दिया, जिसने अयोध्या और अवध के विकास का साथ दिया वह आज प्रभु की कृपा से निरंतर इस राष्ट्र की सेवा में लगा हुआ है। जिन्होंने राम काज में अवरोध खड़े किए, गोलियां चलवाई, त्याग और तपस्या को कुचलने का प्रयास किया उनकी स्थिति भी दुनिया देख रही है।