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आखिरकार रक्षा विभाग ने दी कुकरैल पुल को अनुमति

Tue, 17 Dec 2013 01:29 AM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
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रक्षा विभाग ने कुकरैल बांध पुल को अनुमति राज्य सरकार को दे दी है। इसके बाद राज्य सेतु निर्माण निगम का बाकी निर्माण भी जल्द पूरा कर देगा।
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रक्षा विभाग से अनुमति मिलने की घोषणा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को मीडिया के समक्ष की।

माल एवेन्यु के बाद एक और पुल सेना के साथ जमीनी विवाद में फंस गया था। कुकरैल बांध से खुर्रम नगर होते हुए गोमती बैराज बांध को जोड़ने वाले फ्लाईओवर का निर्माण रुका हुआ था।

पुल के अंतिम छोर तक पहुंचते-पहुंचते सेना की भूमि आ गई। इसके चलते सेना ने बिना रक्षा विभाग की उच्च स्तरीय स्वीकृति के पुल का काम जारी रखने से राज्य सेतु निर्माण निगम को रोक दिया था।
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बस थोड़ा सा ही काम बाकी
सेतु निगम खुर्रम नगर से फैजाबाद रोड के ऊपर से होते हुए गोमती बैराज बंधे के नजदीक तक एक उपरगामी पुल का निर्माण कर रहा है।

इस पुल की वजह से लोगों को करीब ढाई से तीन किलोमीटर की दूरी कम तय करनी पड़ेगी। वाहन चालक खुर्रम नगर, सर्वोदय नगर से फैजाबाद रोड होते हुए पेपर मिल कॉलोनी न होकर पुल से सीधे गोमती बैराज के नजदीक तक पहुंच जाएंगे।

इससे समय बचेगा और कई अहम सड़कों पर जाम की समस्या भी कम होगी। पुल का निर्माण दोनों ओर से लगभग पूरा हो चुका है।

मगर अंत में गोमती बैराज के नजदीक सेना के दावे वाली जमीन आ गई है। इसके चलते काम रोकना पड़ा था।

सियासत में फंसा माल एवेन्यू पुल, जनता बेहाल
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के आवास के सामने बन रहे पुल को लेकर सपा-बसपा की रार खत्म होती नहीं दिख रही। माल एवेन्यु पुल को लेकर सेंट्रल कमांड ने अपनी संस्तुति रक्षा मंत्रालय को दिल्ली भेजी है।

वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही पुल निर्माण का काम आगे बढ़ाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी कहा कि इस पुल को रक्षा विभाग ने स्वीकृति नहीं दी है।
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ऐसे में यह स्पष्ट हो गया कि सपा-बसपा की इस लड़ाई में रक्षा मंत्रालय अपनी टांग नहीं अड़ाना चाहता है। ऐसे में माल एवेन्यु पुल का भविष्य अधर में है।

क्रॉसिंग का रास्ता आम वाहनों के आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है।कटाई पुल पर इस वजह से एक-एक घंटे तक वाहन जाम में फंसे रहते हैं।

मजे की बात यह है कि सियासी लड़ाई का आलम यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के आवास के सामने जो पुल का हिस्सा बन रहा है, उसका काम लगातार जारी है। ऐसी अदूरदर्शिता जनता पर हर रोज भारी पड़ रही है।
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