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सिक्के लेने में मनमानी नहीं करेगा बैंक, Reserve bank ने लिया ये बड़ा फैसला

Tue, 24 Apr 2018 02:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो
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भारतीय रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि आम नागरिक के पास जितने भी सिक्के हों, वे बैंकों में जमा करवा सकते हैं। आपसी लेन-देन यानी एक दूसरे को पैसा लेने-देने में खासतौर से दुकानदारों को किसी वस्तु का मूल्य चुकाते समय सिक्कों में अधिकतम एक हजार रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है।
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लखनऊ में सोमवार को आयोजित मीडिया वर्कशॉप में रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने इस विषय पर आरबीआई के फरवरी 2018 में बैंकों को जारी सूचना का उल्लेख किया। बताया कि बैंकों से सिक्के लेने को कहा गया है। इसे लेकर कोई उलझन नहीं होनी चाहिए। बैंक बिना किसी सीमा के सिक्के जमा करेंगे और इसे नागरिकों को उपलब्ध भी करवाएंगे। इन्हें लेने से बैंक इन्कार नहीं करेंगे।

आरबीआई ने यह भी साफ किया कि अब तक वह 14 तरह के10 रुपये के सिक्के जारी कर चुका है। इनमें से कोई भी नकली नहीं हैं। कोई भी इन्हें लेने से मना न करे। वहीं साढे़ तीन सौ रुपये या ऐसे ही किसी अधिक मूल्य वर्ग के कोई सिक्के वह जारी नहीं कर रहा है। इस तरह की बातें व्हाट्स एप से फैलाई जाती हैं, इन पर जनता विश्वास न करे।
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नोट के टुकड़े हो जाने पर बैंकों में उन्हें जमा करवाया जा सकता है, लेकिन यह बैंक अधिकारी के विवेक पर है कि वह उसे स्वीकार करे अथवा नहीं। अगर नोट के दो टुकड़े हो गए हैं तो बैंक उसका आधा मूल्य काट सकता है। अधिक टुकड़े होने पर अधिक मूल्य काटा जा सकता है।
 
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सिक्के और लखनऊ का मामला

डेमो
दिसंबर 2016 में लखनऊ के एक ब्रेड कारोबारी को यह मामला हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ले जाना पड़ा था। उसका कहना था कि उसका कारोबार ऐसा है, जहां ग्राहक अधिकतर भुगतान सिक्कों में करते हैं लेकिन जब वह इन्हें बैंकों में जमा करवाने जाता है तो समय व स्टाफ कम होने का बहाना करके इन्हें लेने से मना कर देते हैं।

उसके पास 40 लाख रुपये सिक्कों के तौर पर जमा हो गए थे। चीफ जस्टिस ने ये सिक्के रोजाना पांच- पांच हजार रुपये के रूप में बैंक शाखाओं में दोपहर तीन से चार बजे के बीच जमा करने के निर्देश दिए थे। आरबीआई ने बताया कि नागरिक अपने पास आ रहे नोटों को खुद जांचें और अगर उन्हें नकली होने का संदेह है तो देने वाले को लौटा दें।

नागरिक के पास अगर नकली नोट पहुंचता है तो इसका नुकसान उसे ही उठाना होगा, बैंक को नहीं। आरबीआई सुनिश्चित करता है कि बैंकों और एटीएम को जा रहे नोट गलत न हों। मगर, अपवाद स्वरूप ऐसा होता है तो नागरिक बैंक या एटीएम जहां से यह नोट मिला है, वहीं रुक कर बैंक अधिकारी को सूचित करे।

सावधानी के तौर पर वह एटीएम के सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में ही रुक कर सूचना दे और बैंक या पुलिस अधिकारी केपहुंचने का इंतजार करे। ऐसे में किसी अन्य पक्ष के पास उसका दावा नकारने का अवसर नहीं रहेगा। बैंकों में पैसा जमा करवाते समय अगर किसी के पास पांच या पांच से अधिक नकली नोट निकलते हैं तो यह कानून व्यवस्था का केस बनता है, जिस पर एफआईआर दर्ज होगी।
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