प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव से जुड़े सवाल पर मंगलवार को विधानसभा में सपा और सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच जमकर तकरार हुई। सपा सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दर्ज मुकदमे वापस लेने को मुद्दा बनाने की कोशिश की तो सत्तापक्ष ने आतंकियों के मुकदमे वापस लेने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए सपा पर पलटवार किया।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी के नेतृत्व में सपा सदस्य सरकार पर संतोषजनक जवाब न देने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।
दरअसल, सपा के संजय गर्ग ने सरकार से जनवरी 2017 से 31 जुलाई 2018 तक संाप्रदायिक तनाव की घटनाओं की संख्या पूछी थी। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि इस अवधि में बिजनौर व एटा में एक-एक घटना हुई है।
सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की है और ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए डीजीपी ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस पर गर्ग ने 6 फरवरी 2018 को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री द्वारा संसद में सांप्रदायिक तनाव को लेकर दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि 2017 में 822 घटनाएं यूपी में होने की बात कही है और यूपी को ऐसी घटनाओं के लिए सबसे ऊपर बताया गया है।
उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार को लगभग एक ही समय अवधि व एक ही तरह के सवाल का अलग-अलग जवाब देने वाले अधिकारियों को दंडित किए जाने की मांग की। गर्ग ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 20 हजार राजनीतिक मुकदमे वापस लेने की घोषणा की थी लेकिन उन्होंने अपने मुकदमे वापस ले लिए।
खन्ना ने इस कहा कि सपा सरकार ने आतंकियों के मुकदमे वापस लेने का प्रयास किया था। अब उनको सजा भी हो गई। राम गोविंद चौधरी ने प्रश्न का संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए सपा सदस्यों के साथ बहिर्गमन कर दिया।