राजधानी के निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों में अमूमन सभी का ऑक्सीजन लेवल कम है। अस्पताल प्रभारियों की मानें तो 90 प्रतिशत कोविड के संदिग्ध मरीज आ रहे हैं। इनमें ऑक्सीजन लेवल बेहद कम मिल रहा है।
जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर इन मरीजों को पोस्ट कोविड मानकर इलाज किया जा रहा है। चंदन अस्पताल की निदेशक डॉ. अस्मिता सिंह के मुताबिक, उनके अस्पताल में रोजाना छह से सात मरीज भर्ती हो रहे हैं। इनमें से 80 प्रतिशत का ऑक्सीजन लेवल बेहद कम मिल रहा है। जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर इन मरीजों को पोस्ट कोविड मानकर इलाज किया जा रहा है।
रिपोर्ट निगेटिव आए फिर भी रहें सतर्क
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कोविड रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी सतर्क रहें। अगर उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है तो पोस्ट कोविड में जाकर इलाज कराएं। जरा सी लापरवाही जान भी ले सकती है।
जिला प्रशासन ने सभी निजी अस्पतालों को अपने टायज एरिया में मरीजों को रखकर इलाज करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके कई अस्पताल कोविड के लक्षण दिखने पर मरीजों को दूसरे संस्थान भेज रहे है। ऐसे में ऑक्सीजन लेवल गिरने से कई की मौत भी हो रही है।
सरकारी संस्थानों में बेड का संकट
शहर के अधिकतर संस्थानों को कोविड में तब्दील कर दिया गया है। ऐसे में सरकारी संस्थानों में बेड के लिए मारामारी मची है। नॉन कोविड चार अस्पताल बचे हैं। ये सिविल अस्पताल, रानी लक्ष्मीबाई, ठाकुरगंज, बीआरडी महानगर है। हालांकि, सिविल को छोड़कर कही भी इलाज के पूरे संसाधन मुहैया नहीं हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ डीएस नेगी का कहना है कि जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है, वे नॉन कोविड सरकारी अस्पतालों में जाएं। कोविड मरीजों के लिए बेड का थोड़ा संकट है। हालांकि, अस्पतालों में क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है। ऑक्सीजन लेवल गिरने पर जरा भी लापरवाही न बरतें।