यूपी में अवैध शराब बनाने और उसकी बिक्री पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। सरकार कोई भी हो पुलिस व आबकारी विभाग की नाक के नीचे अवैध शराब का धंधा बदस्तूर जारी रहता है। ताजा घटना आजमगढ़ की है जहां जहरीली शराब पीने से एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।
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पिछली सरकारों की तरह इस सरकार में भी निचले स्तर के अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित करके खानापूर्ति की गई है। बड़ों पर कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। अलबत्ता आजमगढ़ में अवैध शराब से मौतों के बाद सरकार हरकत में आई है और आबकारी विभाग ने सात दिन का विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है।
नशे की लत ने आजमगढ़ में एक दर्जन परिवारों का सहारा छीन लिया। वहां रौनापार थानाक्षेत्र की घटना ने 2013 की याद ताजा कर दी जिसमें 11 गांवों में जहरीली शराब पीने से 47 लोगों की मौत हो गई थी। मौजूदा सरकार में अवैध शराब से मौतों की यह पहली बड़ी घटना है। दो माह पहले फर्रुखाबाद की घटना पर अगर आबकारी विभाग ने सक्रियता दिखाई होती तो शायद यह घटना न होती।
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जांच कराकर कार्रवाई की बात कही
मई में फर्रुखाबाद में जहरीली शराब पीने से दो लोग मरे थे। चूंकि मरने वाले सिर्फ दो थे इसलिए ज्यादा शोर नहीं मचा और जिला स्तर पर ही मामला निपट गया। लेकिन आजमगढ़ में लगभग एक दर्जन मौतों से लखनऊ तक हलचल मच गई है। एसओ समेत पुलिस व आबकारी विभाग के नौ कर्मचारी निलंबित कर दिए गए। आबकारी विभाग ने आंतरिक जांच कराकर विभागीय कार्रवाई करने की बात भी कही है।
छोटों पर कार्रवाई कर मामले रफादफा
प्रदेश में अवैध शराब का कारोबार कोई नया नहीं है। इसके खिलाफ अभियान भी खूब चलते हैं लेकिन ज्यादातर दिखावटी ही होते हैं। अधिकतर मामलों में स्थानीय स्तर पर छोटे अफसरों व कर्मियों पर कार्रवाई कर दी जाती है। बड़े अधिकारी और इस पूरे कारोबार को संरक्षण देने वाले बचने में कामयाब हो जाते हैं।
छिन गई थी आबकारी आयुक्त की कुर्सी
अक्टूबर 2013 में आजमगढ़ के ही मुबारकपुर इलाके में शराब पीने से 47 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। जनवरी 2015 में राजधानी के मलिहाबाद क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से 42 लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं के बाद दर्जन भर से अधिक अधिकारियों पर गाज गिरी थी और उन्हें सस्पेंड किया गया था। तत्कालीन आबकारी आयुक्त अनिल गर्ग को हटा दिया गया था।
पिछले कुछ वर्षों में शराब से मौतों की बड़ी घटनाएं
2016--एटा में 24 लोगों की मौत
2015--लखनऊ व उन्नाव में 42 से अधिक की मौत
2013--आजमगढ़ के मुबारकपुर में 47 लोगों की मौत
2011--वाराणसी में 12 लोगों की मौत
खूब फलता-फूलता है अवैध शराब का धंधा
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जिम्मेदारों की लापरवाही या यूं कहिए कि जानबूझ कर आंख मूंद लेने से यह घटनाएं साल दो साल के अंतराल पर होती रहती हैं। अधिकारियों की आंख तभी खुलती है जब कोई बड़ी घटना होती है और शोर लखनऊ तक सुनाई देता है।
दरअसल, दूसरे राज्यों से मिथाइल अल्कोहल मिलाकर बनाई जाने वाली अवैध शराब यहां 50 रुपये प्रति लीटर में खरीदी जाती है और गांवों व कस्बों में 300 रुपये लीटर तक आसानी से बेच दी जाती है।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी भट्ठियों में मिथाइल अल्कोहल से अवैध शराब बनाई जाती है। जाहिर है, मुनाफा बड़ा होता है। चूंकि इसमें सबकी हिस्सेदारी होती है इसलिए जिम्मेदार आंखें मूंदे रहते हैं।
बहराइच, सुल्तानपुर, सीतापुर में भी जा चुकी हैं जानें
डेमो पिक
अवध के कई जिलों में अवैध शराब का धंधा जोरों पर है लेकिन प्रशासन बेखबर है। पुलिस व नेताओं के संरक्षण के कारण अवैध शराब भट्ठियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। सुल्तानपुर में जहरीली शराब पीने से 2013 में मोतिगरपुर थाना क्षेत्र में दो अलग-अलग जगहों पर पांच लोगों की मौत हो चुकी है।
अमेठी जिले के बाजार शुकुल थाने के महोना पश्चिम गांव में जहरीली शराब से पांच लोग काल के गाल में समा गए थे। एक व्यक्ति की दोनों आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद भी गोमती के तराई वाले इलाके में रोज ऐसी भट्ठियां धधकती रहती हैं।
बहराइच में पांच साल पूर्व कैसरगंज के गोड़हिया क्षेत्र में जहरीली शराब से नौ लोगों ने दम तोड़ दिया था। कई लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। मिहींपुरवा में भी पांच लोग मरे थे लेकिन कोई सबक नहीं लिया गया।
सरयू, घाघरा के कछार और कतर्नियाघाट के जंगलों में भट्ठियां धधक रही हैं। शिवपुर में एक साथ 20 भट्ठियों पर शराब बनते देखी जा सकती है। यहां प्रतिदिन छह हजार लीटर की डिमांड है। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के आंबा, बर्दिया, कंचनपुर, नकौहा, मोतीपुर, ऐंचुआ, परवानीगौढ़ी गांव से सटे जंगलों में शराब की भट्ठियां हैं।
अंबेडकरनगर के टांडा, आलापुर व भीटी तहसील के कई क्षेत्रों में अवैध भट्ठियां चल रही हैं। लेकिन कार्रवाई करने में आबकारी विभाग व पुलिस दोनों फेल हैं। सीतापुर जिले के भूड़ इलाके, गोमती की कछार से लेकर बहराइच, बाराबंकी की सीमा को छूने वाली जिले के तराई बेल्ट तक कच्ची शराब का धंधा उद्योग बन चुका है। इसकी सप्लाई लखनऊ तक होती है।
पुलिस अधिकारी सब जानते हुए भी अनजान बने हैं। कई जानें जा चुकी हैं। रायबरेली जिले में भी बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का धंधा चल रहा है। तीन माह में करीब 40 हजार लीटर कच्ची शराब पकड़ी गई। 55 ऐसे गांव हैं जहां कच्ची शराब का कारोबार होता है।
फैजाबाद में शहर से सटे कैंट क्षेत्र में यह कारोबार फलफूल रहा है। गोंडा व बलरामपुर में भी अवैध कारोबार तेजी से चल रहा है। बाराबंकी के कुर्सी में बीहड़पुरवा अवैध शराब का केंद्र बना हुआ है।