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Lucknow News: सेना की फायरिंग रेंज की अधिसूचना की समयसीमा तीन वर्ष बढ़ी

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हाईकोर्ट।
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लखनऊ। अर्जुनगंज में सेना की फायरिंग रेंज की जमीन पर हुए कब्जों से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को एक नई जानकारी दी है। सरकार ने बताया है कि उसने इस फायरिंग रेंज से जुड़ी पुरानी सरकारी अधिसूचना की समय सीमा को तीन साल के लिए और आगे बढ़ा दी है और इसके लिए नई अधिसूचना भी जारी कर दी है।
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यह जानकारी हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई। सरकार की बात सुनने के बाद, कोर्ट ने आदेश दिया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी महीने के चौथे हफ्ते में होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने सुनाया। यह याचिका ब्रिगेडियर तिरबनी प्रसाद ने साल 2011 में डाली थी।

इससे पहले, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि जिलाधिकारी ने 25 सितंबर को ही जमीन की समयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया था, लेकिन इस नए प्रस्ताव में फायरिंग रेंज का कुल इलाका थोड़ा घटा दिया गया है, अब यह 121.339 हेक्टेयर ही रह गया है।
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वहीं, इस मामले में केंद्र सरकार ने कोर्ट में लिखित हलफनामा (शपथ पत्र) देकर कहा था कि जमीन पर अवैध कब्जों की वजह से सेना लंबी दूरी की बंदूकें चलाने की ट्रेनिंग नहीं कर पा रही है। सरकार का तर्क था कि ऑपरेशन सिंदूर जैसी सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए ऐसी ट्रेनिंग रोकना देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है।



अदालत भी इस मामले में पहले ही अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी है। कोर्ट ने कहा था कि सेना के अफसरों ने बार-बार कब्जे रोकने की गुहार लगाई, लेकिन राज्य सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण के अफसर आंख व कान बंद किए बैठे रहे। इसी लापरवाही का नतीजा है कि अब सेना उस जगह पर लंबी दूरी की फायरिंग प्रैक्टिस नहीं कर सकती।
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