सुनीता के भाई दिनेश चंद्र पांडेय निवासी गोमतीनगर ने बताया कि वह तीन दिन पहले घर गए थे। कई बार दरवाजा खटखटाया लेकिन नहीं खुला तो वह वापस चले गए। दिनेश के मुताबिक, अक्सर ऐसा होता रहता था।
लखनऊ के इंदिरानगर के मयूर रेजीडेंसी फेस-1 में रहने वाली सुनीता दीक्षित (61) एचएएल से रिटायर्ड हैं। वह कैंसर रोग से पीड़ित थीं। उनकी मौत पांच दिन पहले हो गई थी। गुरुवार को दुर्गंध आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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वहीं पुलिस के मुताबिक, शव कमरे में पड़ा था। जबकि वहीं मकान के आंगन में एक सोफे पर उनकी मानसिक बीमार बेटी बैठी हुई थी। पुलिस ने बेटी को मामा के सुपुर्द कर दिया। शुक्रवार को शव का अंतिम संस्कार किया गया है।
प्रभारी निरीक्षक इंदिरानगर रामफल प्रजापति के मुताबिक, एचएएल से इंजीनियर केपद से रिटायर्ड सुनीता दीक्षित परिवार के साथ मयूर रेजीडेंसी में रहती थीं। परिवार में उनकी 28 साल की बेटी अंकिता है जिसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।
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दस साल पहले उसके पति ने तलाक दे दिया था। सुनीता कैंसर से पीड़ित थीं। सुनीता के भाई दिनेश चंद्र पांडेय निवासी गोमतीनगर ने बताया कि वह तीन दिन पहले घर गए थे। कई बार दरवाजा खटखटाया लेकिन नहीं खुला तो वह वापस चले गए।
दिनेश के मुताबिक, अक्सर ऐसा होता रहता था। इसलिए उनको किसी अनहोनी की आशंका नहीं थी। प्रभारी निरीक्षक इंदिरानगर रामफल के मुताबिक, सुनीता की बेटी अंकिता को दिनेश की सुपुर्दगी में दिया गया है। किसी तरह का कोई आरोप नहीं लगा है।