लखनऊ। हसनगंज थाना क्षेत्र के बाबूगंज स्थित पशुपालन निदेशालय के आवासीय परिसर में शनिवार को बर्खास्त सीनियर ऑडिटर विकास मोहन अधिकारी का कई दिन पुराना शव मिला। सुबह उनके आवास से तेज दुर्गंध आने पर आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़ा तो विकास का शव मिला। प्रथमदृष्टया बीमारी से उनकी मौत की बात कही जा रही है।
मूल रूप से प्रयागराज के जॉर्ज टाउन के रहने वाले विकास मोहन अधिकारी (61) हसनगंज थाना क्षेत्र के बाबूगंज स्थित पशुपालन निदेशालय में सीनियर ऑडिटर थे। बरसों पहले हुए पशुपालन घोटाले में जांच के बाद 2019 में विकास मोहन अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया था। मगर वह निदेशालय परिसर के आवासीय परिसर में द्वितीय मंजिल पर अपने कमरे में ही रह रहे थे। शनिवार सुबह विकास के कमरे से तेज दुर्गंध आने पर आसपास के लोगों ने यूपी-112 के नंबर पर फोन कर हत्या की आशंका जताई। निदेशालय के कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची हसनगंज पुलिस ने विकास के कमरे दरवाजा तोड़ा तो कमरे में कुर्सी के ऊपर उनकी लाश मिली। इंस्पेक्टर हसनगंज यशकांत सिंह ने बताया कि शव करीब सप्ताह भर पुराना होने के कारण सड़ गया है। कमरा भीतर से बंद होने और शरीर पर चोट के कोई निशान न मिलने से प्रथमदृष्टया बीमारी से मौत होने की आशंका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण स्पष्ट हो जाएगा।
किसी से भी नहीं करते थे बात
लखनऊ। पशुपालन निदेशालय के कर्मचारी सुनील कुमार, प्रदीप, बंगारी व विनोद चौधरी ने बताया कि विकास मोहन अधिकारी अविवाहित थे। रिश्तेदारों से भी वह कोई वास्ता नहीं रखते थे और न ही दफ्तर में उनकी कभी किसी से दोस्ती रही। विकास कभी किसी से बातचीत तक नहीं करते थे। कर्मचारियों ने बताया कि कुछ दिनों से उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह अजीबोगरीब हरकतें करते थे। गंदे कपड़े पहनते थे और नहाते तक नहीं थे। ऐसे में कर्मचारियों का मानना है कि विकास की मौत बीमारी से हुई है।