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घूमने निकले छात्र का शव तालाब में मिला, घर वालों के उड़े होश

Fri, 28 Sep 2018 04:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो
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लखनऊ के ठाकुरगंज निवासी रियल एस्टेट कारोबारी मो. खालिद के बेटे उमर खालिद (14) की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। वह बुधवार दोपहर पिता की बाइक लेकर घूमने के लिए निकला था और लौटकर नहीं आया। परिवारीजनों ने खोजबीन की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। बृहस्पतिवार सुबह उसकी बाइक सतखंडा के पास लावारिस खड़ी मिली। कुछ देर बाद घंटाघर के सामने तालाब में उसका शव उतराता मिल गया। परिवारीजनों ने किसी तरह का आरोप नहीं लगाया है।

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चौक कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि मो. खालिद मूलरूप से बलरामपुर के गोविंदघाट के रहने वाले हैं। उनका बेटा उमर खालिद क्रिश्चियन कॉलेज में कक्षा सात का छात्र था। बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे पिता-पुत्र घर से निकले। खालिद नमाज पढ़ने चले गए जबकि उमर उनकी बाइक लेकर घूमने की बात कहकर कहीं चला गया।

नमाज पढ़ने के बाद खालिद घर आए और बेटे का इंतजार करने लगे। काफी देर तक वह घर नहीं आया तो उन्होंने उमर का मोबाइल नंबर डायल किया। पता चला कि वह मोबाइल घर पर ही छोड़ गया है। उन्होंने बेटे की खोजबीन की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। दोस्तों व परिचितों से संपर्क करने पर भी उसका कुछ पता नहीं चला।
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बृहस्पतिवार सुबह करीब सात बजे किसी ने सतखंडा के पास उनकी बाइक खड़ी होने की सूचना दी। वह मौके पर पहुंचे और आसपास खोजबीन की तो घंटाघर के सामने स्थित तालाब में बेटे का शव उतराता देखकर होश उड़ गए। सूचना पाकर आई पुलिस ने शव बाहर निकलवाया। प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उमर की मौत डूबने से होने की पुष्टि हुई है।

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तालाब में नहीं सुरक्षा के इंतजाम, पहले भी हो चुकी मौत

उमर खालिद अपने माता-पिता का एकलौता बेटा था। उसकी मौत की खबर से परिवारीजन सदमे में हैं। मो. खालिद ने बताया कि वह पत्नी फिरदौस, बेटी इकरा और बेटे उमर के साथ कुछ साल पहले लखनऊ आए थे। बेटे को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाने की हसरत थी।

उमर का शव देखकर फिरदौस और इकरा बेसुध हो गईं। आसपास के लोगों ने उन्हें संभाला। घंटाघर के तालाब में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। तालाब में दिनभर आसपास के लोग नहाते और पानी से खिलवाड़ करते हैं। उमर खालिद से पहले भी एक किशोर की तालाब में डूबकर मौत हो चुकी है।

इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन ने यहां नजर रखने की जरूरत नहीं समझी। अगर कोई तालाब में उतर जाता है तो सहारे के लिए किनारों पर पाइप तक नहीं लगे हैं। तालाब की निगरानी करने के लिए सीसीटीवी कैमरे हैं न ही सुरक्षाकर्मी। किसी डूबते को बचाने के लिए गोताखोर भी नहीं हैं। 
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