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Lucknow News: पास से ज्यादा एलडीए में निरस्त हो रहे मानचित्र, एक साल की रिपोर्ट से सामने आया आंकड़ा

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एलडीए।
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लखनऊ। एलडीए में मानचित्र के आवेदन जितने भी पहुंच रहे हैं, उसके आधे भी पास नहीं हो रहे। ऐसे में मानचित्र पास कराने के लिए लोगों को एलडीए के चक्कर काटने के साथ ही तरह-तरह के जतन भी करने पड़ते हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट से यही बात सामने आ रही है। मानचित्र आसानी से पास हो जाएं, इसके लिए मानचित्र विभाग ने जागरूक करने की कोई व्यवस्था भी नहीं की है।
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आपको अपना घर, दुकान, काॅम्प्लेक्स, होटल, अस्पताल या कोई अन्य निर्माण करना है तो एलडीए से मानचित्र पास कराना होता है। सरकारी नियम के तहत आवेदन करने के बाद एक महीने में मानचित्र पास हो जाना चाहिए, मगर हकीकत में ऐसा होता नहीं है। लोग जब सिफारिश के साथ ही फीस व अन्य कार्याें पर मोटा पैसा खर्च करते हैं, तब उनका मानचित्र पास हो पाता है।
22 जून को अलीगंज अग्निकांड के बाद एलडीए का जोर यह है कि जिन लोगों ने मानचित्र के विपरीत निर्माण कर लिया है, वह उसका शमन कराकर मानचित्र पास करा लें, ताकि उनका निर्माण वैध हो जाए, लेकिन एलडीए के मानचित्र विभाग में जिस रफ्तार से काम हो रहा है, उससे लोग अपने निर्माण आसानी से वैध करा पाएंगे, आसान नहीं दिखता। एक भवनस्वामी ने बताया कि उसके मानचित्र का आवेदन चार महीने बाद तब पास हुआ, जब मानचित्र विभाग के लोग खुश हुए। उससे पहले वह अलग-अलग कमियां बताकर चक्कर कटवाते रहे।
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रिपोर्ट ने खोली पोल
बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक मानचित्र के 4,006 आवेदन आए, लेकिन इसमें पास महज 2,074 ही हुए। 1,514 निरस्त कर दिए गए और 40 को पेंडिंग में डाल दिया गया। इसी तरह जिन लोगों ने मानचित्र के विपरीत निर्माण कर लिया था, उन्होंने शमन मानचित्र जमा किया, इनकी संख्या 1,115 रही, मगर इनमें से पास महज 160 ही पास हुए। एलडीए के मानचित्र विभाग ने 377 आवेदन निरस्त कर दिए और 85 पेंडिंग में डाल दिए। ऐसे में यदि शमन और नए आवेदन जोड़ दें तो यह संख्या 5,115 होती है, इसमें जो मानचित्र पास हुए, उनकी संख्या 2,234 होती है।
जानकारी छुपा रहे जिम्मेदार
अलीगंज अग्निकांड के बाद नई भवन निर्माण उपविधि के तहत शमन मानचित्र पास कराने वालों की संख्या बढ़ी है, मगर जिम्मेदार जानकारी छुपा रहे हैं। कितनों ने लोगों ने शमन कराया और कितना शमन किया जा सकता है, इसकी कोई जानकारी जिम्मेदार नहीं दे रहे। जानकारों का कहना है कि लोग शमन मानचित्र मिलीभगत कर पास कर ले रहे हैं, मगर मौके पर उस हिसाब से शमन नहीं कर रहे हैं, यानी अवैध हिस्से को तोड़ नहीं रहे। सूत्रों ने बताया कि शमन मानचित्र में फीस का भी खेल चल रहा है, जिसकी सेटिंग हो जाती है, उसे फीस में राहत मिल जाती है। यानी जितना पैसा जमा करना होता है उससे कम में काम चल जाता है।
Iजो आवेदन मानक के तहत नही होते, वह कैसे पास होंगे। उन्हें निरस्त कर दिया जाता है। आवेदन की व्यवस्था ऑनलाइन है और एक महीने में मानचित्र पास करने का नियम है, लेकिन जिनमें कमियां होती हैं, उनमें देर भी होती है। अलीगंज अग्निकांड के बाद शमन मानचित्र के आवेदन बढ़े हैं, मगर कितने बढ़े, यह जानकारी अभी नहीं दी जा सकती। हर तरह के मानचित्र की तय फीस है। ऐसे में कम-ज्यादा का कोई मसला नहीं है। जागरूक करने को लेकर प्रचार की अभी कोई व्यवस्था विभाग में नहीं है।I
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I- केके गौतम, मुख्य नगर नियोजक, एलडीएI
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