लखनऊ। दिलकुशा गार्डन में रविवार को रंगोली बिहू का उल्लास छाया रहा। असम एसोसिएशन के आयोजन में महिलाओं ने खेल और बिहू नृत्य से रंग जमाया।
उत्सव की शुरुआत सुबह गोडू पूजा (गाय पूजन) के साथ हुआ। महिलाओं और पुरुषों ने गाय को कच्ची सब्जियां खिलाईं। इसके बाद हल्दी, चावल और लौकी का लेप लगाकर उसे मटके के पानी से नहलाया। असम की पारंपरिक पोशाक पहनीं महिलाओं ने लोकगीत गाए। इसके बाद पट्टी बांधकर महिलाओं ने मटके पर लट्ठ मारे।
दिपाली दत्त सैकिया और सुमित्रा भट्ट ने बताया कि पर्व में पकवान बनाए जाते हैं। अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में देलनाथ, डॉ. जागृति कलिता, जेएल बोडो, बिपिन रलहा, प्रांजल बोरह, तालुकदास, बीजू भागौती, पोहर सैकिया दिगनता सैकिया, रीफन बोरा, मयंक मौजूद रहे।
बिहू उत्सव प्रकृति के प्रति प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह एक बड़े पेड़ के नीचे मनाया जाता है। असमिया नव वर्ष, वसंत का जश्न मनाते हैं।