भारतेंदु नाट्य अकादमी का कला मंडपम बुधवार को उत्तर-पूर्व भारत की संस्कृति में रंग गया। नाटक मोंगली के मंचन ने दर्शकों की उत्तर-पूर्व भारत की संस्कृति का परिचय कराने के साथ ही उनकी भावनाओं को भी कुरेदा। बीएनए में अध्ययनरत द्वितीय सेमेस्टर के छात्रों ने पारंपरिक नाट्य परंपरा के विधिवत प्रशिक्षण के आधार पर नाटक का मंचन किया।
यह कहानी बूढ़े आदमी की पांच बहुओं में से सबसे छोटी बहू पर आधारित है। गांव-गांव घूमने वाली इस बहू को लोग मोंगली के नाम से पुकारते थे। एक दिन वह अपने घर से गायब हो जाती है। नाटक की कहानी के आधार पर सामाजिक व्यवहार, रीति-रिवाज, रहन- सहन के माध्यम से बोडो समुदाय की संस्कृति बताई गई। नाटक में विशालदीप, सुरज्जान, आशीष मिश्रा, मानसी, आयुष, अंकित, शैलेश, एकाग्र, अक्षय, अनुराग, नंदिनी, कर्तुम, दिवाकर, शहंशाह, आशीष यादव, सुंदरम, भारत, आकाश, हिमांशी, सनश्री, रवम्वी और रानी ने अभिनय से सभी का मन मोह लिया। फ़ुलेन, जगन्नाथ, निकंता, जेंगसर और जीतू राभा ने संगीत की आत्मा को विस्तार दिया। नाटक का आलेख संयोजन, परिकल्पना एवं निर्देशन पबित्र राभा ने किया।