राजधाीन में कोरोना से होने वाली मौतें कम करने के लिए सस्ते दर पर सीटी स्कैन सेंटर तय करने पर विचार
केजीएमयू के विशेषज्ञों ने डीएम को बताए अनुभव
राजधानी में नया मॉडल विकसित करने की तैयारी
चंद्रभान यादव
केस वन
केजीएमयू के डॉक्टर कोरोना की चपेट में आ गए। वह खुद को फिट बता रहे थे, लेकिन सीटी स्कैन किया तो फेफड़े में संक्रमण करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। तत्काल उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया और इलाज शुरू किया गया। अब उनकी हालत में सुधार है।
केस दो
जानकीपुरम निवासी 55 वर्षीय मरीज होम आइसोलेशन में था। ऑक्सीजन लेवल 95 रहा। तीन दिन बाद अचानक ऑक्सीजन का स्तर गिरकर 90 पर आ गया। केजीएमयू पहुंचे तो सीटी स्कैन में फेफड़ों में 30 से 35 फीसदी तक संक्रमण पाया गया।
लखनऊ। कोरोना की चपेट में आने वालों का तत्काल सीटी स्कैन करा लिया जाए तो मृत्यु दर में गिरावट आ सकती है। केजीएमयू के विशेषज्ञों ने इस रणनीति को अपनाकर कई मरीजों की जान बचाने में कामयाबी पाई है। अब जिला प्रशासन इसी रणनीति के आधार पर राजधानी में नया मॉडल तैयार करने की तैयारी में है। इसके लिए डीएम ने सीएमओ को सीटी स्कैन सेंटर तय करने और उस पर आने वाले खर्च का मूल्यांकन करते हुए रिपोर्ट बनाने को कहा है।
राजधानी में पॉजिटिव मरीज कम हुए हैं, पर आईसीयू और एचडीयू वाले मरीज ों की संख्या बरकरार है। वहीं, अब तक 725 राजधानी वासियों की जान जा चुकी है। ऐसे में प्रशासन की रणनीति है कि मृत्यु दर भी कम की जाए। शनिवार को केजीएमयू पहुंचे डीएम अभिषेक प्रकाश ने कोविड हॉस्पिटल के चिकित्सा विशेषज्ञों से इसकी रणनीति पर विचार विमर्श किया। विशेषज्ञों ने बताया कि कई मरीजों में दूसरी समस्याएं थीं, लेकिन तत्काल सीटी स्कैन कर उनके फेफड़ों की स्थिति का आकलन कर लिया गया। इससे इन्हें बचाने में सहूलियत रही। जिनका फेफड़ा 10 से 20 प़्रतिशत ही प्रभावित रहता है, उन्हें इससे संबंधित दवाएं तत्काल शुरू कर दी जाती हैं। इससे फेफड़ों में संक्रमण नहीं बढ़ता। वहीं, आम तौर पर फेफड़ा प्रभावित होने की जानकारी तब मिलती है जब वह 50 फीसदी तक संक्रमित हो जाता है। यदि सस्ती दर पर सुविधा मिले तो ऑक्सीजन का स्तर गिरते ही तत्काल सिटी स्कैन करवाकर उसी हिसाब से इलाज शुरू हो सकेगा। विशेषज्ञों की इस सलाह पर डीएम ने सीएमओ डॉ. संजय भटनागर को विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। कहा कि कोविड के मरीजों को सस्ते दर पर सिटी स्कैन की सुविधा दिलाने के लिए विभिन्न सेंटर संचालकों से बात की जाएगी। इस आधार पर नया मॉडल तैयार किया जा सकता है। अभी तक इस तरह की सुविधा किसी भी जिले में नहीं है।
फेफड़ों के प्रभावित होने से आती है समस्या
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस फेफड़े, हार्ट सहित अन्य अंगों की बारीक नसों को क्षतिग्रस्त कर देता है। जिनकी नसों में क्लाटिंग हो जाती है, उनमें रिकवरी में लंबा समय लग जाता है। फेफड़े की नसों के क्षतिग्रस्त होने, शरीर के अन्य ऊतकों के मृतप्राय होने से शरीर की आंतरिक मशीनरी की पूरी प्रक्रिया सुस्त हो जाती है। इसे बचाने के लिए कई दवाइयां देनी पड़ती हैं। यदि दवाएं समय पर नहीं गईं तो फेफड़े की नसें सिकुड़ती चली जाती हैं, जो मौत की वजह बन जाती हैं।
कोविड हॉस्पिटल आने वाले मरीजों की सीटी स्कैन से पता चला कि उनका फेफड़ा प्रभावित हुआ है। हालांकि, ऊपरी तौर पर इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है। ऐसे मरीजों में जरा सा लापरवाही जान के लिए खतरा बन जाता है। आमतौर पर फेफड़े खराब होने के लक्षण तब मिलते हैं जब वह 50 प्रतिशत से ज्यादा संक्रमित हो जाते हैं। सीटी स्कैन कराने से 10 से 15 प्रतिशत संक्रमण पर भी जानकारी मिल जाती है। सस्ते दर पर सीटी स्कैन की सुविधा हो तो होम आइसोलेशन वाले भी इसे कराने लगेंगे। फिर उसी आधार पर मरीजों को जल्द अस्पताल में भर्ती किया जा सकेगा। इससे मृत्यु दर में कमी आ सकती है।
प्रो. डॉ. अविनाश अग्रवाल, विभागाध्यक्ष क्रिटिकल केयर मेडिसिन, केजीएमयू