केजीएमयू के डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारी से पीड़ित तीन माह के बच्चे की जटिल सर्जरी की है। बच्चे के दिमाग का फ्लुइड तथा दिमाग का कुछ हिस्सा बाहर निकलकर बच्चे की दोनों आंखों पर आ गया था। यह लगातार बढ़ता जा रहा था। फूटने की स्थिति में बच्चे की जान को खतरा हो सकता था। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जेडी रावत की अगुवाई में उसका ऑपरेशन किया गया। शुक्रवार को बच्चे को छुट्टी भी दे दी गई। केजीएमयू में इस तरह की सर्जरी का यह पहला मामला है।
मैनपुरी निवासी विपन कुमार अपने एक दिन के बच्चे को लेकर 18 सितंबर को पहली बार केजीएमयू आए थे। बच्चे का जन्म सैफई मेडिकल कॉलेज में हुआ था। बच्चे की दोनों आंखों पर गोले जैसे उभरे हुए थे। डॉक्टरों ने इसे बाइलिट्रल नेजल इंसेफलोसील बताया और इलाज के लिए केजीएमयू रेफर किया। यहां डॉक्टरों ने इसे बढ़ने से रोकने के लिए दवाएं दीं तथा कुछ समय बाद सर्जरी करने की बात कही। बच्चे को बीच-बीच में फॉलोअप के लिए बुलाया गया। 26 नवंबर को उसे यहां भर्ती किया गया। एक दिसंबर को उसका ऑपरेशन किया गया। बच्चा अब काफी हद तक सामान्य है। सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. निक्षेप त्यागी, सिस्टर वंदना, सिस्टर अंजू ओर बेहोशी के डॉक्टर प्रेम राज सिंह शामिल रहे।
हर कदम पर आई समस्या
प्रो. रावत ने बताया कि सर्जरी के दौरान हर कदम पर चुनौती सामने आई। सर्जरी से पहले ऑप्थेमोलॉजी और न्यूरो सर्जरी विभाग से भी सलाह ली गई। एनेस्थीसिया देने के दौरान भी काफी समस्या आई। दोनों आंखों के ऊपर उभरे हिस्से की वजह से उसे मास्क लगाने में भी परेशानी आ रही थी, इसलिए मास्क के नीचे रुई लगाई गई। सबसे पहले उभरे हिस्से में निडल डालकर उसका फ्लुइड निकाला गया। अच्छी बात यह थी कि दिमाग का कुछ हिस्सा ही बाहर आया था, इसलिए उसे अंदर करके अतिरिक्त हिस्से को निकाल दिया गया। डॉ. जेडी रावत के अनुसार फॉलोअप के दौरान अगर जरूरत पड़ी तो प्लास्टिक सर्जरी कर दी जाएगी।
प्रोटीन की कमी से होती है समस्या
प्रो. जेडी रावत के अनुसार यह बीमारी 35 से 40 हजार बच्चों में से किसी एक को होती है। सिर के एक हिस्से वाले मामले आमतौर पर मिलते हैं पर दोनों हिस्सों वाला केजीएमयू में यह पहला मामला आया था। यह समस्या गर्भ के दौरान महिलाओं में प्रोटीन की कमी की वजह से होती है। प्रोटीन की वजह से फोलिक एसिड कम हो जाता है जिसकी वजह से बच्चे के दिमाग को ढकने वाली हड्डियां और बाकी हिस्सा नहीं बन पाता है। इसकी वजह से दिमाग के भीतर का फ्लुइड और उसका हिस्सा बाहर आने लगता है।