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UP: जेब ढीली करो, जेल में होगा जलवा!

Thu, 07 Aug 2014 12:22 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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कानपुर के हाईप्रोफाइल ज्योति मर्डर केस के आरोपियों को जेल में पिज्जा-बर्गर व अन्य सुविधाओं का मिलना कोई हैरत की बात नहीं। यह तो जेल विभाग की अंदरूनी व्यवस्था बन गई है जिससे नेता-अफसर सभी अवगत हैं।
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जितना बड़ा दबंग या जितना रसूख, उतनी सुविधा। शर्त सिर्फ इतनी कि हर सुविधा के लिए बटुआ ढीला करना पड़ता है। फिर चाहे घर से मंगा कर खाना खाया जाए या होटल से या फिर बैरक में ही मनचाही डिश पक जाए। यहां शराब से लेकर कबाब तक सब कुछ हासिल है।

जेल विभाग के लोग करते हैं मदद

यह लगभग हर बार होता है कि जेल जाने वाले रसूखदार, राजनेता या बड़े अपराधियों को जेल पहुंचते ही अस्पताल की सुविधा मिल जाती है। उन्हें सामान्य बैरक में भी नहीं रहना पड़ता।

अन्य बंदियों से अलग रहते हुए वे घर जैसी सुविधाएं पा जाते हैं। खाने और अन्य सुविधाओं के साथ ही उन्हें बैरक में मोबाइल फोन तक की सुविधा मिल जाती है। यह चीजें कोई और नहीं बल्कि जेल विभाग के ही लोग रुपये लेकर उपलब्ध कराते हैं।

कुछ अरसा पहले अदालत ने जेल की इस व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई थी। तब मामला पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को लेकर उठा था।

जेल में रहकर करते वसूली

आमतौर पर रसूखदार जेल अधिकारियों व डॉक्टरों की मिलीभगत से जेल में दाखिल होने के फौरन बाद अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं।

वे न सिर्फ मनमाने तरीके से वहां रहते हैं बल्कि सभी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। जेल अस्पताल में उनसे मिलने मुलाकाती भी आते हैं।

वहां से उनका धंधा चलता रहता है। कई बार ऐसी शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं कि जेल में निरुद्ध रहने के दौरान दबंग, माफिया आदि द्वारा बाहर लोगों को धमकी दी जा रही है और अवैध वसूली भी हो रही है।

जेल अफसर भी डरते हैं

जेल अधिकारियों-कर्मचारियों का गठजोड़ कुछ ऐसा बन चुका है कि यहां सब कुछ मैनेज हो जाता है। एसटीएफ ने कुछ वर्षों पूर्व इस नेक्सस को तोड़ने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

कभी कोई जेल अधिकारी इस गठजोड़ में शामिल नहीं होता और रसूखदारों या माफिया पर सख्ती करने पर आमादा हो जाता है।

ऐसे में उसे रास्ते से हटाने में भी लोग पीछे नहीं रहते। पूर्व में कई जेल अधिकारियों को इसी वजह से अपनी जान गंवानी पड़ी। जेल में इन्हें सारी सुविधाएं तो मिलती हैं पर ऊंची कीमत पर।

नहीं बर्दाश्त की जाएगी मनमानी

इस पर अपर पुलिस महानिदेशक कारागार जगमोहन यादव का कहना है कि जिला कारागारों में अनियमितता या अधिकारियों-कर्मचारियों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएग़ी। कानपुर जेल में इस तरह की सूचना मिलने पर मैंने ही वहां के डीएम व एसएसपी से जांच के लिए कहा था। रिपोर्ट आने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी तय है।

जेल में अलग तरह का भ्रष्टाचार है
वहीं पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता का कहना है कि हर विभाग में भ्रष्टाचार है। जेल में भी है। यहां अपने तरह से काम होता है। रसूखदारों, माफिया और दबंगों के धनबल व बाहुबल के सामने जेल अधिकारी झुके रहते हैं।

व्यवस्था में सुधार लाने के लिए जिलों में डीएम व एसपी को और जेल मुख्यालय के अधिकारियों को समय-समय पर औचक जांच करते रहना चाहिए। लेकिन उनके निरीक्षण की बात आमतौर पर लीक हो जाती है।

मुख्यमंत्री के समारोह में भी गए अपराधी

केस 1- जुलाई 2012 में पूर्व मंत्री नंद गोपाल गुप्त नंदी पर जानलेवा हमला करने के आरोप में नैनी जेल में निरुद्ध सपा के बाहुबली विधायक विजय मिश्र लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में स्वास्थ्य खराब होने के बहाने भर्ती हुए। जिस तकलीफ का हवाला देकर उन्हें जेल अधिकारियों ने लखनऊ भेजा था, उसकी बलरामपुर अस्पताल और पीजीआई दोनों ने पुष्टि नहीं की। मिश्र लखनऊ में न सिर्फ मंदिरों में दर्शन करते देखे गए बल्कि अपने परिचितों के यहां भी आते-जाते रहे।

केस 2- 2012 में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के सम्मान में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा दिए भोज में एक नहीं बल्कि दो ऐसे बाहुबली शामिल हुए जो विधान सभा सत्र में शामिल होने के नाम पर जेल से न्यायिक अभिरक्षा में लखनऊ लाए गए थे। नियमत: इन्हें सत्र में शामिल होने के बाद वापस जेल में या जेल चिकित्सक द्वारा रेफर किए गए अस्पताल में दाखिल कराना चाहिए था पर ऐसा नहीं किया गया।
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अफसर को दी जान से मारने की धमकी

केस 3- जेल में सुविधा न देने वाले जेल अधिकारी एसके पुंडीर को जान से मारने की धमकी देने का भी एक मामला माफिया मुख्तार अंसारी पर चल रहा है। मुख्तार के खिलाफ 1999 में मुकदमा दर्ज हुआ था। उस पर भी बीमारी के नाम पर जेल या जिला अस्पताल में भर्ती होते रहने का आरोप है। मुख्तार को जिला कारागार में हर तरह की सुविधा मिलने की ऊपर तक जानकारी है, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

केस 4- कवियत्री मधुमिता हत्याकांड में पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी भी कभी जेल अस्पताल तो कभी दूसरी जेल आते-जाते रहे। उनके रसूख के आगे जेल प्रशासन नतमस्तक रहा। अमरमणि ने जेल में रहने के दौरान ही अपने केस को हलका करने, गवाहों को धमकाने व अपने पक्ष में फर्जी गवाह खड़ा करने की कोशिश की।

केस 5- सुल्तानपुर जेल में निरुद्ध माफिया मुन्ना बजरंगी को जेल में कई सुविधाएं मिलने का आरोप है। उसके गुर्गे उससे मिलने आते रहते हैं, पर जेल प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। मुन्ना के खिलाफ जेल में रह कर विरोधियों को धमकाने व उसके इशारे पर उसके गुर्गों द्वारा वसूली करने का भी आरोप है।
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