पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, कभी इंदिरानगर से लेकर मुंशीपुलिया तक अपराधियों के ठिकाने हुआ करते थे। इंदिरानगर की कॉलोनियों में रिहायश बढ़ी तो अपराधियों ने सुरक्षित ठिकाना तलाशना शुरू कर दिया। इसी बीच 90 के दशक में गोमतीनगर विकसित हुआ तो अपराधी यहीं से गिरोह चलाने लगे।
इसके बाद विस्तार के राप्ती, गंगा, सतलज, सरयू, अलकनंदा, सरस्वती, यमुना अपार्टमेंट में बिहार व पूर्वांचल के अपराधियों ने अपनी पहुंच बना ली। वहीं, विभूतिखंड के सबसे महंगे और वीआईपी अपार्टमेंट ओमेक्स व रोहतास प्लूमेरिया में भी अपराधियों की पहुंच है। अंसल सिटी और वृंदावन कॉलोनी में भी अपार्टमेंट और विला में भी अपराधियों के सुरक्षित अड्डे हैं।
पूर्वांचल व बिहार के बदमाश पहले प्रॉपर्टी का काम करने वाले कारोबारी को निशाना बनाते हैं। इसके बाद सुरक्षा देने के नाम पर महीने की रकम बांध लेते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे उनके कारोबार में हिस्सेदार भी बन जाते हैं। इसके अलावा मिट्टी खनन, ठेके के नाम पर अवैध वसूली करते हैं। अगर किसी सफेदपोश से ताल्लुक हो जाएं तो टिकट भी पा जाते हैं।
- पीजीआई के वृंदावन में ठेकेदार सुनील सिंह पर जानलेवा हमला।
- अंसल सिटी में ओमेक्स अपार्टमेंट में डॉक्टर को अगवाकर बंधक बनाने का मामला।
- पीजीआई के वृंदावन कॉलोनी में गोरखपुर के हिस्ट्रीशीटर दुर्गेश यादव की गोली मारकर हत्या।
- ओमेक्स अपार्टमेंट अर्जुनगंज में कोयला कारोबारी को बंधक बनाकर करोड़ों की डकैती।
- गोमतीनगर विस्तार में मुन्ना बजरंगी के करीबी रहे तारिक की गोली मारकर हत्या।
- अलकनंदा अपार्टमेंट में छात्र की चाकू से गोदकर हत्या।
- गंगा अपार्टमेंट में बिहार के बाहुबली के भाई को अवैध असलहों के जखीरे के साथ पकड़ा जाना।