चारा घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिए जाने और एमबीबीएस सीट घोटाले में रशीद मसूद को चार साल की कैद होने के बाद यह चर्चा है कि सिलसिला जारी रहना चाहिए।
जनता के हित की योजनाओं में अपना उल्लू सीधा करने वाले नेता कई और भी हैं। यूपी में तो ऐसे नेताओं की लंबी सूची है।
भले ही यह राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम हो या एक-दूसरे पर अंकुश बनाए रखने की पैंतरेबाजी, पिछले कुछ सालों के दौरान विभिन्न राजनैतिक दल सत्ता में आते ही विरोधी दल के नेताओं के कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं।
इसी का नतीजा है कि पिछली बसपा सरकार के नौ से ज्यादा मंत्रियों पर मौजूदा सरकार ने विजिलेंस, ईओडब्ल्यू या पुलिस को-ऑपरेटिव सेल की जांच की तलवार लटका रखी है।
कई राजनेता लोकायुक्त की जांच में फंसे, जिनके मामलों की बाद में विभिन्न एजेंसियों ने जांच की। वैसे अभी तक सरकार की ओर से सिर्फ एक ही पूर्व मंत्री के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई कराई जा सकी है। आरोपी बनने के अलावा कुछ नहीं हुआ।
एनआरएचएम घोटाले की अगर सीबीआई जांच न हुई होती तो शायद पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा सरीखे दागी नेता अभी भी जेल न पहुंच पाए होते।
एक-दो पूर्व मंत्रियों की बात अगर छोड़ दी जाए तो भ्रष्टाचार या अन्य आरोपों से घिरे राजनेताओं में से ज्यादातर का अभी तक जांच में आरोपी पाए जाने के अलावा और कुछ नहीं बिगड़ सका है।
मामलों के परीक्षण का बहाना
मौजूदा हालात में कई दागी नेता ऐसे हैं जिनके खिलाफ सतर्कता विभाग या आर्थिक अपराध शाखा ने कार्रवाई के लिए सरकार से इजाजत मांगी हुई है।
सरकार ने ऐसे मामलों में अभी जांच एजेंसियों को इस बहाने की आड़ में अनुमति नहीं दी है, कि मामले का परीक्षण किया जा रहा है और न्याय विभाग से परामर्श लेने के बाद कोई फैसला किया जाएगा।
दागी नेताओं की बानगी
बाबू सिंह कुशवाहा
एक समय मायावती सरकार के ताकतवर मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा ने अब सपा से नाता जोड़ लिया है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में फंसे बाबू सिंह के दामन पर न सिर्फ लैकफेड घोटाले की छींटे हैं बल्कि सीएमओ हत्याकांड में भी उनकी तरफ अंगुलियां उठी थीं। सीबीआई की जांच के चलते बाबृू सिंह कुशवाहा फिलहाल डासना जेल में निरुद्ध हैं। उनके मामले की सुनवाई सीबीआई कोर्ट में चल रही है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी
लोकायुक्त की जांच में फंसे हैं। आय से अधिक संपत्ति के आरोप के साथ ही स्मारक घोटाले में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता में पूर्व मंत्री की गहरी संलिप्तता मानी जा रही है। सतर्कता अधिष्ठान ने इस मामले में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ खुली जांच करने के बाद मुकदमा दर्ज करने की इजाजत मांगी हुई है। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन के खिलाफ सतर्कता जांच के आदेश मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा की रिपोर्ट पर दिए थे। लोकायुक्त की जांच में नसीमुद्दीन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति व बांदा तथा अन्य स्थानों पर उनके व रिश्तेदारों द्वारा नजूल भूमि पर कब्जा करने के आरोपों की प्रारंभिक जांच में पुष्टि हो चुकी है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
राम अचल राजभर
पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपी। रामअचल राजभर को सतर्कता विभाग की जांच में इस आरोप में दोषी पाया गया था। सतर्कता विभाग ने इस पूर्व मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दायर किया था। राजभर के बैंक खातों व बेनामी संपत्तियों के आधार पर यह कार्रवाई की गई थी। जांच अभी चल रही है।
रंगनाथ मिश्र
भ्रष्टाचार के मामले में जेल में निरुद्ध पूर्व माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र के खिलाफ पहले लोकायुक्त ने जांच की थी। पूर्व मंत्री पर पद का दुरुपयोग करने, सरकारी योजनाओं की रकम में धांधली करने, बेनामी संपत्ति बनाने जैसे कई आरोप हैं। लोकायुक्त ने मिश्र के खिलाफ सतर्कता विभाग से जांच कराने की सिफारिश की थी। राज्य सरकार की अनुमति पर सतर्कता विभाग ने रंगनाथ मिश्र के खिलाफ खुली जांच करने के बाद मुकदमा दर्ज किया।
बादशाह सिंह
दबंग छवि वाले बादशाह सिंह जेल में निरुद्ध हैं। उन पर लैकफेड घोटाले में संलिप्तता के आरोप हैं। बादशाह सिंह ने पिछली सरकार में श्रम मंत्री रहते हुए अपने विभाग को लैकफेड से काम दिलाने के एवज में करोड़ों की घूस खाई। जांच में यह साबित भी हुआ कि उन्होंने पांच करोड़ की घूस मांगी थी। इसके बाद जांच एजेंसियों को दस्तावेजी प्रमाण भी हासिल हो गए। बादशाह सिंह के मामले में अदालत में तारीख लग रही हैं।
चंद्रदेव राम यादव
पूर्व लघु उद्योग मंत्री चंद्रदेव राम और पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र दोनों को ही पुलिस को-ऑपरेटिव सेल ने लैकफेड घोटाले में दोषी माना था। आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोपी पाए गए पूर्व मंत्री ने बाद में अदालत में समर्पण कर दिया था। वह अभी भी जेल में हैं और उनके मामले की सुनवाई हो रही है।
अवधपाल सिंह यादव
पूर्व पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्य मंत्री अवधपाल सिंह यादव पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने, पशु चिकित्सालयों के निर्माण में अनियमितता बरतने और ग्राम समाज की जमीनों पर कब्जा करने जैसे आरोप हैं। उनके खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान ने पहले खुली जांच की थी और दोषी पाते हुए सरकार से इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की इजाजत मांगी थी। विजिलेंस जांच चल रही है।
राम प्रसाद जायसवाल
पूर्व विधायक राम प्रसाद पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के खास लोगों में से एक हैं। वह भी एनआरएचएम घोटाले में संलिप्त होने की वजह से पूर्व मंत्री के साथ ही जेल में हैं। राम प्रसाद जायसवाल पर लैकफेड मामले में भी घपलेबाजी करने का आरोप है। वह सीबीआई की जांच में दोषी पाए गए हैं। उनके मामले की सुनवाई सीबीआई कोर्ट में चल रही है।