वाणिज्य कर महकमे का वह ‘कौन’ अफसर है जो संजीव मिश्रा से केस कराने की आड़ में एक करोड़ रुपये की घूस देने का दबाव बनाए था।
अफसर ने शर्त रखी थी कि रुपये का इंतजाम होने पर ही आना तभी सुनवाई होगी।
परिवार का आरोप है कि इसी प्रताड़ना के चलते ही संजीव ने खुदकुशी कर ली।
संजीव के पिता सुबोध मिश्रा ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि मेरे बेटे को वाणिज्य कर छापे डाल-डालकर प्रताड़ित किया गया।
बेटे की अक्सर मोबाइल पर किसी वाणिज्य कर अफसर से दिन में कई-कई बार बात होती थी। इस दौरान सिर्फ केस कराने के नाम पर एक करोड़ रुपये की घूस की बात होती।
दोनों के बीच होने वाली बातचीत फैक्ट्री के कर्मचारी भी सुनते थे जिन्होंने आत्महत्या के बाद मुझे बताया। जब संजीव घूस की रकम अधिक होने की बात कहता तो अफसर धमकाता था कि केस कराना है तो रकम को इंतजाम करो।
फोन के चंद मिनट पर गोमतीनगर स्थित वाणिज्य कर मुख्यालय से रिकवरी की रकम जल्द जमा करने का दबाव बनाता था। पूर्व में पड़े आयकर एवं उत्पाद शुल्क के ताबड़तोड़ छापे से आर्थिक चोट हुई थी।
लेकिन सबसे अधिक प्रताड़ना वाणिज्य कर विभाग ने दी। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को वाणिज्य कर आयुक्त से मिलकर उत्पीड़न की दास्तां सुना दोषी अफसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
कठघरे में कॉर्पोरेट सेल
वाणिज्य कर विभाग (विशेष अनुसंधान शाखा) ने 29 दिसंबर 2010 को श्याम बहार गुटखा की तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित फैक्ट्री पर छापामारी कर 230 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर टैक्स चोरी का दावा किया था।
संजीव ने टैक्स चोरी के एवज में कई करोड़ रुपये की रकम को जमा कर प्रकरण को न्यायालय में ले गये थे। इसी प्रकरण को लेकर कॉर्पोरेट सेल कठघरे में आ गया है। दरअसल बड़े कारोबारियों की सुनवाई इसी सेल में होती है।