आतंकियों को एनआईए की स्पेशल कोर्ट ले जाया गया
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कानपुर से मंगलवार को गिरफ्तार किए गए आईएसआईएस के खुरासान ग्रुप के संदिग्ध आतंकी आतिफ और आसिफ को बुधवार को एनआईए न्यायालय में पेश किया गया।
एनआईए के विशेष न्यायाधीश आरके उपाध्याय ने दोनों को 24 अगस्त तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एनआईए गुरुवार को इन्हें रिमांड पर लेने के लिए आवेदन करेगी।
एनआईए के सूत्रों ने दावा किया है कि गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी आतिफ ने ही लखनऊ में पिछले साल अक्तूबर में दशहरे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली स्थल के पास बम रखा था। कम इंटेनसिटी का बम होने के कारण इसका पता नहीं चला था।
गत सात मार्च को लखनऊ में सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद इस मामले की जांच में आतिफ और आसिफ का नाम सामने आया था। आतिफ सैफुल्लाह का चचेरा भाई है। एनआईए काफी समय से दोनों पर निगाह रख रही थी और कई बार पूछताछ कर चुकी थी।
देश को दहलाने का कर रहा था प्रयास
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इससे पहले एनआईए के मुख्य विवेचक तथा एसपी दीपक कुमार ने अदालत से आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजने का अनुरोध किया।
उन्होंने बताया कि एटीएस के उपाधीक्षक मनीष चंद्र सोनकर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 8 मार्च 2017 को उन्हें सूचना मिली थी कि आईएसआईएस इंटरनेट पर अपने विडियो अपलोड करने के साथ ही आतंकी घटनाएं करके देश को दहलाने का प्रयास कर रहा है।
7 मार्च 2017 को मध्यप्रदेश के शाजापुर में आईएसआईएस के सदस्य फैसल खां, दानिश, मुजफ्फर, सैफुल्लाह तथा अजहर ने पैसेंजर ट्रेन में ब्लास्ट किया था। इस सूचना के बाद 8 मार्च को फैसल को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद केंद्र सरकार ने मामले की विवेचना एनआईए को सौंप दी। विवेचना में पता चला कि फैसल देश में आतंकी घटनाएं करने की फिराक में था। वहीं आतिफ राज्य के खिलाफ युद्ध लड़ने के लिए हथियारों की व्यवस्था कर रहा था।
तीन और संदिग्ध एनआईए के राडार पर
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सूत्रों की मानें तो तीन और संदिग्ध एनआईए के राडार पर हैं। एनआईए इन पर भी निगाह रखे है और इनके बारे में सुबूत जुटाने के बाद कार्रवाई करेगी।
एटीएस ने पहले आतिफ को हिरासत में लिया था और लंबी पूछताछ की थी, लेकिन पुख्ता सुबूत न मिलने के कारण इस शर्त के साथ छोड़ दिया था कि भविष्य में बुलाने पर वह हाजिर होगा।