मोहनलालगंज मामले में लखनऊ पुलिस की लचर तफ्तीश को लेकर ऊपर तक असंतोष दिख रहा है। आला अफसरों में भी इस बात की चर्चा है कि मामले का खुलासा जरूर कर दिया गया है लेकिन कई तथ्य सामने नहीं आ सके हैं।
प्रमुख सचिव गृह राकेश बहादुर भी मानते हैं कि इस मामले में अभी कई सवालों का जवाब मिलना बाकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कुछ बातें ऐसी सामने आई हैं जिनसे गफलत बढ़ी है।
किडनी को लेकर उठे सवाल के लिए गठित दो सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट दो दिन में आ जानी है, इसके बाद ही स्थितियां स्पष्ट होंगी।
प्रमुख सचिव गृह से सीधी बात
सवाल- इस मामले में पुलिस की जांच और डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं?
जवाब- देखिए इस मामले में मुख्यमंत्री और सरकार का रुख शुरू से ही साफ रहा है। जांच में कोई ढिलाई न हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसीलिए अधिकारियों के नेतृत्व में टीम बनाई गई थी, जिसने जांच की।
जांच के दौरान कई बातें ऐसी सामने आई हैं, जिनके जवाब अभी नहीं मिल सके हैं, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और उसने अदालत में भी बयान दर्ज कराया है। कोर्ट में दिए गए बयान के दौरान उस पर किसी तरह का दबाव नहीं था, ऐसे में अगर वह अपना जुर्म स्वीकार कर रहा है, तो इसे नकारा नहीं जा सकता।
पोस्टमार्टम को लेकर जो विवाद उत्पन्न हुआ है, उसकी जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। इसकी रिपोर्ट दो दिन में आ जाएगी। इसके बाद डॉक्टरों की भूमिका तय हो सकेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही कहा जा सकेगा कि किसकी कितनी गलती थी। अगर गलती पाई जाएगी तो कार्रवाई भी कड़ी होगी।
सुतापा सान्याल से नहीं हुई बातचीत
सवाल- इस मामले की जांच का प्रभारी कौन हैं। एडीजी सुतापा सान्याल या कोई और?
जवाब- संवेदनशील मामला होने की वजह से सरकार ने इसकी जांच का सुपरविजन एडीजी सुतापा सान्याल को सौंपा था। जांच उनके नेतृत्व में ही हो रही है।
सवाल- लेकिन एडीजी ने खुद को इस मामले से अलग हटाने की कोशिश क्यों की?
जवाब- एडीजी ने खुद को जांच से अलग हटाने की बात क्यों कही, यह पता नहीं है।
सवाल- क्या उनसे इस बाबत कोई पूछताछ की गई?
जवाब- अभी नहीं। लेकिन इस संदर्भ में बात की जाएगी।
इसलिए बयान से पीछे हटे डीआईजी
सवाल- डीआईजी नवनीत सिकेरा ने भी किडनी मामले में होने वाली जांच से खुद को अलग करने की कोशिश की है?
जवाब- डीआईजी ने किडनी मामले की जांच को तकनीकी विषय बताते हुए इसका विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल से जांच कराने का आग्रह किया था। जांच से हटने की बात नहीं है।
सवाल- जांच टीम इस मामले में होने वाली प्रगति की रिपोर्ट किसे करती है, प्रमुख सचिव गृह, सचिव गृह, डीजीपी या शासन के किसी उच्च अधिकारी को?
जवाब- जो टीम जांच कर रही है, वह इसकी प्रगति से डीजीपी एएल बनर्जी को अवगत कराती है। समय-समय पर डीजीपी शासन को इसकी प्रगति की जानकारी देते रहते हैं।
सवाल-आपका क्या मानना है कि केस का सही खुलासा हुआ अथवा नहीं?
जवाब- केस के गलत खुलासे की बात समझ में नहीं आती। मुख्यमंत्री जब निष्पक्ष जांच के लिए कह चुके हैं, तब इसका सवाल ही नहीं होता। शायद कुछ बातों को लेकर असमंजस है लेकिन पूरी जांच होने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी।