सौतेले पिता के खौफ से 12 वर्ष की शिल्पी घर नहीं जाना चाहती। डरी-सहमी मासूम ने बताया कि सौतेला पिता मारता है और खाने तक को नहीं देता। इसी के चलते मासूम शनिवार को घर से भाग निकली।
इंदिरानगर में भटक रही मासूम को नवजागृति आश्रयगृह में जगह दिलाई गई है। काकोरी के जेहटा गांव की रहने वाली शिल्पी ने बताया कि सौतेले पिता चुन्नीलाल के जुल्म से बचने के लिए घर से भागने को मजबूर हुई है।
कपड़े धोने, बर्तन मांजने के साथ ही उससे घर का सारा काम कराया जाता। इसके बाद भी पूरा पेट खाना नहीं मिलता और मांगने पर पीटा जाता।
चाइल्ड लाइन सदस्य मनोज ने बताया कि मासूम भटकती हुई इंदिरानगर पहुंच गई। यहां जयपुरिया स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में एडीजी के पीआरओ सत्या सिंह से मदद मांगी।
इस पर सत्या सिंह ने मासूम को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया। बाद में उसे बाल कल्याण समिति की सहायता से नवजागृति आश्रयगृह में पहुंचा गया।
मनोज ने बताया मासूम के घर वालों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। चाइल्ड लाइन के निदेशक अंशुमालि शर्मा ने बताया कि इस तरह बच्चों के उत्पीड़न के कई मामले आते हैं जिन्हें चाइल्ड लाइन गंभीरता से ले रहा है।