एलडीए में भ्रष्टाचार का पर्याय बने नटवरलाल बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मंगलवार को वीसी प्रभु एन सिंह ने बाबू की बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया।
ओझा के ऊपर पूर्व वीसी के जाली हस्ताक्षर उपयोग कर भूखंडों का समायोजन करने, पत्नी के नाम फर्जी आवंटन व एक योजना से दूसरी योजना में नियम विरुद्ध समायोजन में मामले साबित हुए। वह 28 फरवरी 2017 से निलंबित चल रहा था। मंगलवार को उसे बर्खास्त करने का फरमान सुना दिया गया।
बाबू की बर्खास्तगी की यह कार्रवाई प्रियदर्शिनी योजना से विराटखंड, गोमतीनगर में पत्नी के नाम गलत समायोजन, रुचिखंड शारदानगर योजना में फर्जी आवंटन पत्र जारी करने, कोर्ट के आदेश न मानने और गोमतीनगर विस्तार में पूर्व वीसी के हस्ताक्षर स्कैन करके भूखंड समायोजन करने के मामले में की गई है। एलडीए के आदेश के मुताबिक बाबू ने पत्नी रेनू ओझा के नाम प्रियदर्शिनी योजना के सेक्टर-डी में भूखंड संख्या 1/6 आवंटित कराया।
तत्कालीन वीसी सत्येंद्र सिंह के सामने यह प्रकरण आने के बाद बाबू को 28 फरवरी को निलंबित कर जांच संयुक्त सचिव धनंजय शुक्ला को दी गई। उनके ट्रांसफर के बाद जांच नजूल अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने की। जांच पूरी होने के बाद बाबू के ऊपर लगे 11 में से 10 आरोप सही और एक आंशिक रूप से सही पाए गए।