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LDA का नटवरलाल बाबू बर्खास्त, जमीनों का किया था हेरफेर, 10 और भूमाफिया निशाने पर

Wed, 01 Nov 2017 02:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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नटवरलाल बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा - फोटो : amar ujala
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एलडीए में भ्रष्टाचार का पर्याय बने नटवरलाल बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मंगलवार को वीसी प्रभु एन सिंह ने बाबू की बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया।
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ओझा के ऊपर पूर्व वीसी के जाली हस्ताक्षर उपयोग कर भूखंडों का समायोजन करने, पत्नी के नाम फर्जी आवंटन व एक योजना से दूसरी योजना में नियम विरुद्ध समायोजन में मामले साबित हुए। वह 28 फरवरी 2017 से निलंबित चल रहा था। मंगलवार को उसे बर्खास्त करने का फरमान सुना दिया गया।

बाबू की बर्खास्तगी की यह कार्रवाई प्रियदर्शिनी योजना से विराटखंड, गोमतीनगर में पत्नी के नाम गलत समायोजन, रुचिखंड शारदानगर योजना में फर्जी आवंटन पत्र जारी करने, कोर्ट के आदेश न मानने और गोमतीनगर विस्तार में पूर्व वीसी के हस्ताक्षर स्कैन करके भूखंड समायोजन करने के मामले में की गई है। एलडीए के आदेश के मुताबिक बाबू ने पत्नी रेनू ओझा के नाम प्रियदर्शिनी योजना के सेक्टर-डी में भूखंड संख्या 1/6 आवंटित कराया।
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तत्कालीन वीसी सत्येंद्र सिंह के सामने यह प्रकरण आने के बाद बाबू को 28 फरवरी को निलंबित कर जांच संयुक्त सचिव धनंजय शुक्ला को दी गई। उनके ट्रांसफर के बाद जांच नजूल अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने की। जांच पूरी होने के बाद बाबू के ऊपर लगे 11 में से 10 आरोप सही और एक आंशिक रूप से सही पाए गए।
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जवाब देने के लिए मांगा था एक माह का समय

- फोटो : amar ujala
इसके बाद बाबू को अपनी सफाई देने के लिए पिछले महीने एक और मौका दिया गया। बाबू ने जवाब देने की जगह एक और महीने का समय एलडीए से मांगा। इसके लिए सचिव जयशंकर दुबे ने अधिष्ठान विभाग को मना कर दिया।

जांच अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बाबू के ऊपर आरोप गंभीर हैं। बाबू भ्रष्ट और गैरजिम्मेदार, जाली दस्तावेज के उपयोग करने का दोषी है। आरोपी प्राधिकरण में सरकारी काम के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है। वह यूपी सरकारी आचरण नियमावली 1999 के प्रावधानों के मुताबिक बड़ी सजा का पात्र है। इसके बाद बाबू के नियुक्ति अधिकारी व वीसी प्रभु एन सिंह ने अपने आदेश में बाबू की सेवाएं तत्काल बर्खास्त कर दिया।
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