गिरोह के खिलाफ बरेली व एटा में अधिकारियों ने अवैध वसूली और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया था। बरेली में तैनात डायट प्राचार्य मुन्ने अली से जांच के नाम पर एक लाख रुपये की मांग की गई थी। जब उन्होंने उच्चाधिकारियों से बात की तो ठगी का पता चला। जबकि एटा के जेलर कुलदीप सिंह भदौरिया के पास मुख्यमंत्री के ओएसडी के नाम से फोन आया और इसमें जांच के नाम पर डराया गया। जेलर ने जब पता किया तो जांच की बात गलत निकली।
दो बार जेल जा चुका है अतुल शर्मा
एसटीएफ निरीक्षक ज्ञानेंद्र राय के मुताबिक वर्ष 2007 में अतुल शर्मा को अफसरों से अवैध वसूली के आरोप में जेल जाना पड़ा था। वहां से छूटने के बाद वर्ष 2010 में चित्रकूट के तत्कालीन डिप्टी एसपी अखिलेश्वर पांडेय को धमकाकर पैसे की मांग की थी। इस पर फिर उसे जेल जाना पड़ा था।
दोनों मामलों में हजरतगंज थाने में ही मुकदमा दर्ज हुआ था। तब से वह निलंबित चल रहा है और उसकी बर्खास्तगी की कार्रवाई भी चल रही है। राय ने बताया कि धमकाने पर जो अधिकारी या कर्मचारी झांसे में आ जाते, उन्हें गिरोह के जालसाज सचिवालय के पास बुलाते थे। इसके बाद अतुल अपने साथियों प्रदीप व राधेश्याम को पैसे लेने के लिए भेज देता था। ये लोग जांच का फर्जी आदेश भी पास रखते थे।