अपर जिला न्यायाधीश एसएन अग्निहोत्री ने निवेशकों के करोड़ों हड़पने की आरोपी मैग्नम ग्रुप की निदेशक नीलम चतुर्वेदी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ पुलिस ने मैग्नम ग्रुप के खिलाफ दर्ज अन्य मुकदमों की पैरवी शुरू कर दी है। वादिनी कीर्ति सिंह ने 11 सितंबर को गुडंबा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इसमें बताया कि मैग्नम इंफ्रा डेवलपर्स के निदेशक अरुण चतुर्वेदी,वरुण चतुर्वेदी तथा नीलम चतुर्वेदी ने सब्जबाग दिखाया कि जितनी राशि जमा की जाएगी,उसका 5 प्रतिशत निवेशकों को प्रतिमाह लाभांश के रूप में दिया जाएगा।
इस पर वादिनी ने 11 लाख रुपये जमा किए,जिसका लाभांश कुछ समय बाद मिलना बंद हो गया। इस बाबत मैग्नम के निदेशक से शिकायत की तो वादिनी को चेक दे दिया गया जो कि बाउंस हो गया।
इस मामले में अर्जी पर सुनवाई के दौरान नीलम के वकील ने कहा कि नीलम को बिना साक्ष्य के आरोपी बनाया गया है,जबकि वह निदेशक नहीं थी।
पत्रावली के अवलोकन के बाद कोर्ट ने नीलम को जमानत पर रिहा करने के आदेश दे दिए। वहीं,मैग्नम ग्रुप के खिलाफ दर्ज 75 मुकदमों की तफ्तीश में जुटी पुलिस टीम ने अन्य मामलों में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने के साथ पैरवी की है।