एलएलबी छात्र होने के साथ मोगली शातिर अपराधी भी है। शिवकुटी थाना में उसने ताबड़तोड़ फायरिंग कर इलाहाबाद में सनसनी मचा दी थी।
उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मोगली ने आशीष का पता लगाने के लिए अंकित दुबे का इस्तेमाल किया।
मोगली ने अंकित को अपने घर पर साथ रहने और परिवार का नमक खाने का वास्ता दिया। अंकित उसे आशीष तक पहुंचाने के लिए तैयार हुआ।
इसके बाद मोगली ने इलाहाबाद विवि के छात्र नेता व पीसीबी हॉस्टल में रहने वाले गोंडा के बस्ती, रानीपुर थाना क्षेत्र स्थित इटिया चौक निवासी सुमित शुक्ला उर्फ अच्युतानंद शुक्ला और उसके दोस्त अनुज सिंह को साथ लिया।
अनुज के पिता शीश पाल सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं। पुलिस सूत्र बताते हैं कि सुमित और मोगली मिलकर अपराध करते थे। मंगलवार को मोगली ने अपने दोस्त उत्सव सिंह की स्विफ्ट डिजायर कार (यूपी 70 बीवी 7774) ली।
इसके बाद मोबाइल घर पर छोड़कर चारों चल दिए। आशीष की लोकेशन लेने के लिए अंकित को एक नया मोबाइल व सिमकार्ड दिया।
एएसपी क्राइम आरके सिंह ने बताया कि रात करीब 12 बजे चारों आशीष के घर पहुंचे तो ताला लगा मिला। इसके बाद गोमतीनगर में टहलते रहे।
एक बजकर दस मिनट पर फिर पहुंचे तो लाइट जलती मिली। अंकित ने हिस्ट्रीशीटर के नंबर पर फोन किया तब रोहित ने दरवाजा खोला। उस वक्त आशीष सो रहा था।
आहट पर नींद टूटी तो अंकित को देखते ही उठकर बैठ गया। इसी दौरान गेट बंद करने की बात कहते हुए अंकित बाहर चला गया।
इसके साथ ही मोगली, सुमित और अनुज भीतर घुसे और ताबड़तोड़ फायरिंग कर आशीष और रोहित को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद चारों सुल्तानपुर होते हुए इलाहाबाद लौट गए। गोमतीनगर के मोबाइल फोन टॉवर खंगालने पर पुलिस को एक नंबर मिला।
इससे आशीष के नंबर से इलाहाबाद से लखनऊ तक बातचीत हो रही थी। पुलिस इसी नंबर के सहारे हत्यारों तक पहुंची।
हत्यारोपी आशीष का मोबाइल फोन इसलिए ले गए, क्योंकि उसमें अंकित के कई एसएमएस और कॉल्स थीं। मोबाइल में मिलने वाली जानकारियों से बदमाशों को पकड़े जाने का डर था।