समय टॉफी देने के बहाने बुलाया था। शव सुबह गांव के तालाब में मिला। पूरा शरीर मिट्टी से धंसा था। बच्ची के केवल पैर नजर आ रहे थे।
पास में ही एक तकिया का खोल पड़ा हुआ था। दोपहर बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा किया। दोनों पर बच्ची के अपहरण, हत्या, दुष्कर्म की कोशिश, पॉक्सो और दलित एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की पुष्टि हुई है। दुष्कर्म की संभावना में स्लाइड भी बनाई गई है। मासूम के पिता पुताई का काम करते हैं। परिवार में पत्नी, दो बेटे व साढ़े चार साल की इकलौती बेटी थी। बच्ची के पिता ने बताया कि वह सुबहकाम पर चले जाते हैं और रात में लौटते हैं।
शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे बच्ची घर के बाहर खेल रही थी, तभी लापता हुई और तब से उसका पता नहीं चला। करीब नौ बजे पुलिस को सूचना दी गई। चौकी इंचार्ज मौके पर पहुंचे और लोगों के साथ बच्ची को तलाशते रहे। सुबह गांव में रहने वाले गोलू ने बताया कि तालाब किनारे किसी बच्चे का शव पड़ा है।
बड़ी ही बेरहमी से मारकर दफना दिया
गोलू अपने चाचा के खेत पर गया था, तब उसने शव देखा। शव की शिनाख्त होते ही गांव में कोहराम मच गया। इलाकाई लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
पुलिस पूछताछ में पता चला कि जहां पर बच्ची का शव मिला है, वहां आदर्श उर्फ लल्ली को शनिवार शाम देखा गया था। पुलिस ने लल्ली को दबोच लिया। पूछताछ में उसने परचून दुकानदार मनीष सविता उर्फ मुनीश का नाम लिया। पुलिस ने उसे भी धर दबोचा।
घंटों पूछताछ के बाद बिठूर एसओ ने बताया कि दोनों ने अपराध कबूल लिया है। दोनों ने टॉफी देने के बहाने बच्ची को बुलाया और उसे अगवा करके मनीष की दुकान की कोठरी में ले गए।
वहां दुष्कर्म की कोशिश की। इसी बीच परिजनों ने बच्ची की तलाश शुरू कर दी। तब दोनों ने तकिये से बच्ची का मुंह दबा दिया। इसके बाद उसे तकिया के खोल में भरकर एक किनारे रख दिया। बकौल पुलिस इतना करने के बाद दोनों बाहर निकले।
लल्ली अपने घर चला गया, जबकि मनीष बच्ची की तलाश का नाटक करने लगा। देर रात करीब तीन बजे दोनों फिर मिले और बिटिया को मृत समझकर तालाब में दबा आए। एसओ ने बताया कि बच्ची की मौत डूबने से हुई है। ये लोग उसे मृत समझकर वहां से चले गए।