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एलडीए: जाली साइन बना रजिस्ट्री बाबू ने बेच दिए 13 भूखंड, किया गया निलंबित

Sat, 09 Oct 2021 04:13 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

एलडीए में जाली साइन बनाकर बेचे गए भूखंड का मामला अधिकारियों की जांच में सामने आया है। आरोपी ने जून में रजिस्ट्री सेल में तैनाती के एक माह बाद से बाबू ने खेल शुरू कर दिया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एलडीए में योजना सहायकों से लेकर संपत्ति अधिकारियों तक के जाली हस्ताक्षर बना 13 भूखंड बेच देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भूखंडों के आवंटन से लेकर निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री कराने का यह घपला करने वाले रजिस्ट्री सेल में तैनात बाबू पवन कुमार को वीसी अक्षय त्रिपाठी ने निलंबित कर दिया है। एफआईआर कराने के लिए एलडीए की ओर से गोमतीनगर थाने में तहरीर दी है। वहीं, 20 करोड़ के इन भूखंडों की रीसेल रोकने के लिए निबंधन कार्यालय, उपनिबंधक द्वितीय को दूसरी रजिस्ट्री नहीं किए जाने के लिए सूची भेज दी गई है।

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एलडीए सचिव पवन कुमार गंगवार ने बताया कि संपत्ति अधिकारियों के नामों का उपयोग कर रजिस्ट्री कराने के प्रकरण जानकारी में आए थे। जांच में 13 भूखंडों की रजिस्ट्री कराए जाने का पता चला। इनकी रजिस्ट्री के लिए भूखंडों के आवंटन और जरूरी अनुमोदन की फाइल तक उपलब्ध नहीं हैं। जिन अधिकारियों, योजना सहायक, अनुभाग अधिकारी के हस्ताक्षर रजिस्ट्री पर किए गए, वे सभी जाली हैं। पूछताछ में पता चला कि पवन कुमार रजिस्ट्री कराने निबंधन कार्यालय जाता था। उसने ही जाली रजिस्ट्री डीड तैयार करा उस पर खुद हस्ताक्षर बनाए।

इसके बाद प्रपत्र को ले जाकर रजिस्ट्री करा दी। इस बाबू की तैनाती जून में रजिस्ट्री सेल में की गई थी। उसने 14 जुलाई को ही पहली रजिस्ट्री अनुचित तरीके से कराई। एलडीए को मिले रिकॉर्ड के मुताबिक जुलाई में दो, अगस्त में चार, सितंबर में छह, अक्तूबर में एक भूखंड की रजिस्ट्री कराई गई। इसमें आवासीय और व्यावसायिक दोनों भूखंड हैं। मामले की सही से जांच हो तो घपले में दूसरे बाबू और अधिकारी के अलावा भू-माफिया व दलालों की संलिप्तता मिल सकती है।
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देर रात थाने ले जाकर पूछताछ
जिस बाबू को फर्जीवाड़ा करते पकड़ा गया, उसने यह खेल तब किया जब एलडीए बाहरियों की ओर से भूखंड बेच दिए जाने को लेकर चर्चा में बना था। कई प्रकरण में प्राधिकरण एफआईआर भी करा चुका है। पुलिस ने आधा दर्जन गिरफ्तारियां भी कीं। सचिव की सूचना पर प्राधिकरण भवन पहुंची गोमतीनगर पुलिस बाबू को पूछताछ के लिए देर रात थाने ले गई। दोपहर से एलडीए अधिकारियों ने उसे पूछताछ और जानकारी जुटाने के लिए बैठाकर रखा था।

जिनके पास योजना नहीं, उनके नाम से रजिस्ट्री
बाबू ने जाली रजिस्ट्री बनाने में उन अधिकारियों के नाम, हस्ताक्षर और फोटो इस्तेमाल किए, जो योजना ही नहीं देखते हैं। ओएसडी राजीव कुमार और नजूल अधिकारी आनंद कुमार सिंह के नाम से यह रजिस्ट्री हैं, जबकि सितंबर से गोमतीनगर योजना को ओएसडी अमित राठौर देख रहे हैं। अगस्त तक आनंद कुमार सिंह योजना देख रहे थे।

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ये भूखंड बेच डाले बाबू ने

- 2/156ए विनम्रखंड, पीर मोहम्मद के नाम रजिस्ट्री
- 2/200एफ विनम्रखंड, अवधेश कुमार के नाम रजिस्ट्री
- 2/202ए-1 विनम्रखंड, उमाशंकर के नाम रजिस्ट्री
- 3/123 विनम्रखंड, रविंद्र कुमार सिंह के नाम रजिस्ट्री
- 1/153ए विनम्रखंड, इशरत जहां के नाम रजिस्ट्री
- 3/630 वास्तुखंड, मो. शकील के नाम रजिस्ट्री
- 3/96 विकल्पखंड, अनीता के नाम रजिस्ट्री
- 4/67ए विकल्पखंड, मीना के नाम रजिस्ट्री
- 2/51एम विराजखंड, राजनाथ मिश्रा के नाम रजिस्ट्री
- 2/150 विराजखंड, राजेश पाठक के नाम रजिस्ट्री
- 2/62 विभूतिखंड, नीरज सिंह के नाम रजिस्ट्री
- 3/293 विराटखंड, रामऔतार पाल के नाम रजिस्ट्री
- 1/162 विनीतखंड, राजनाथ मिश्रा के नाम रजिस्ट्री
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