बुकिंग और जमा आईडी से गुत्थी ऐसी उलझी कि लाश अभिनव की या अर्पित की यह तय करने में पुलिस को चार घंटे लग गए। पहले पुलिस को लगा कि अभिनव की हत्या की गई है। उसके बारे में छानबीन शुरू हुई।
पता चला कि बहराइच के राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में कंप्यूटर साइंस के अतिथि शिक्षक रहे अभिनव का दो महीने पहले उत्तराखंड सचिवालय में कंप्यूटर लिपिक के पद पर चयन हुआ था। इस पर उसने 31 मार्च को बहराइच के पॉलीटेक्निक कॉलेज की नौकरी छोड़ दी थी। पुलिस ने कानपुर के बगाही में रह रहे उसके भाई को फोन किया।
इस बीच अर्पित के बारे में शाहजहांपुर पुलिस से संपर्क किया गया। पता चला कि बृहस्पतिवार को त्रिवेणी एक्सप्रेस से लखनऊ रवाना हुए अर्पित का देर रात मोबाइल बंद हो जाने से परेशान परिवारीजनों ने रविवार सुबह बहादुरगंज थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई है।
भाई कर रहा था लखनऊ में तलाश
पता चला कि अर्पित की तलाश में उसका बड़ा भाई अंकित दीक्षित शनिवार से लखनऊ में है। उसके परिवारीजन शाहजहांपुर से देरशाम लखनऊ पहुंचे। इस बीच राजधानी में रह रहे रिश्तेदारों ने शव की शिनाख्त की।
पुलिस सीसीटीवी से सुराग की तलाश कर रही है।
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अर्पित से बृहस्पतिवार रात 9 बजे एक अन्य युवक मिलने आया था। कमरे से दो मोबाइल फोन, शराब की दो खाली बोतलें और जली हुई सिगरेट के ढेर सारे टुकड़े मिले। कमरे में रखे बैग से कपड़ों के साथ एक जोड़ी झुमकी, मेकअप का सामान, शेविंग किट, आईसीआईसीआई बैंक का एटीएम कार्ड मिला।
कंप्यूटर इंजीनियर की तलाश में जुटी पुलिस
होटल के कर्मचारियों और अर्पित के परिवारीजनों से तहकीकात व सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस ने कानपुर के रहने वाले कंप्यूटर इंजीनियर अभिनव पाल की सरगर्मी से तलाश शुरू की है। अर्पित व अभिनव के बीच संबंधों की गहन छानबीन की जा रही है।
फेसबुक आईडी ने उलझाया
अंकित ने होटल के कमरे में मिले दोनों मोबाइल फोन पहचानते हुए कहा कि वह अर्पित के हैं लेकिन उसने दोनों में पासवर्ड लगा रखे थे। बताया कि अर्पित की फेसबुक आईडी लगातार ऑपरेट की जा रही है। पुलिस को कंप्यूटर इंजीनियर अभिनव पाल द्वारा उसकी फेसबुक आईडी लॉगइन किए जाने का शक है।