फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Murder in Lucknow: रेलवे ठेकेदार को दिन दहाड़े घर में घुसकर मारी गोली, बेटे ने कहा- सेना की वर्दी में थे बदमाश

Sat, 25 Jun 2022 09:57 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

परिवारीजनों के मुताबिक शनिवार दोपहर करीब 12.30 बजे तीन बदमाश घर के अंदर दाखिल हुए। जो सेना की वर्दी पहने थे। उन्होंने घुसते ही बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद वीरेंद्र ठाकुर के कमरे में गए, जहां वह बेड पर लेटे हुए थे। अंदर दाखिल होने के बाद बदमाशों ने उन पर हमला बोल दिया।
विज्ञापन
घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कैंट के नीलमथा बाजार में रहने वाले रेलवे ठेकेदार वीरेंद्र ठाकुर (42) की शनिवार दोपहर में तीन बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम दिन दहाड़े करीब 12.30 बजे किलाबंद मकान में घुसकर दिया गया। वारदात में शामिल तीन बदमाशों ने सेना की वर्दी पहनी थी। सूचना पर पहुंची ने पड़ताल शुरू कर दिया है। पुलिस के मुताबिक बदमाश घर में लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को भी अपने साथ ले गए। ठेकेदार वीरेंद्र ठाकुर पर तीन साल पहले चारबाग स्टेशन पर हमला हुआ था। पुलिस इस मामले में कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रही है।

विज्ञापन


एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक मूलरूप से बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया जिला निवासी वीरेंद्र ठाकुर कैंट एरिया के नीलमथा बाजार में परिवार सहित रहते थे। परिवार में दूसरी पत्नी खुशबू, तीन बेटे अभिषेक, ऋषि और अंश (सभी पहली पत्नी प्रियंका से हैं) शामिल हैं। परिवारीजनों के मुताबिक शनिवार दोपहर करीब 12.30 बजे तीन बदमाश घर के अंदर दाखिल हुए। जो सेना की वर्दी पहने थे। उन्होंने घुसते ही बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद वीरेंद्र ठाकुर के कमरे में गए, जहां वह बेड पर लेटे हुए थे। अंदर दाखिल होने के बाद बदमाशों ने उन पर हमला बोल दिया। इसके ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। वीरेंद्र को दो गोलियां लगी थीं। गंभीर हालत में परिवारीजन उनको लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पड़ताल शुरू कर दी।

2019 में हुआ था चारबाग पर हमला
पुलिस के मुताबिक वीरेंद्र ठाकुर रेलवे के ठेकेदार थे। वीरेंद्र का कुछ लोगों से ठेके को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बाद उन पर फायरिंग की गई थी। वारदात चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में हुआ था। वारदात दो जुलाई की रात करीब 12 बजे हुई थी। जिसका मुकदमा पहली पत्नी प्रियंका ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ जीआरपी थाने में दर्ज कराया था। इस वारदात में गोली वीरेंद्र के कमर में लगी थी। जिसके कारण बाद में उनको चलने में दिक्कतें होनी लगी।
विज्ञापन


पहली पत्नी से चल रहा है विवाद
2019 में हुए वारदात के कुछ दिन बाद से ही पहली पत्नी प्रियंका से वीरेंद्र की दूरियां बढ़ने लगीं। दोनों में विवाद होने लगा। इसी बीच वीरेंद्र की नजदीकी खुशबू से बढ़ गई थी। विवाद इतना अधिक हो गया कि प्रियंका व वीरेंद्र अलग-अलग रहने लगे थे। लेकिन वीरेंद्र ने पहली पत्नी के तीनों बच्चों को अपने पास ही रख लिया था। बच्चों को लेकर कई बार कहासुनी व विवाद हुआ।

जनवरी से ले रखी थी निजी सुरक्षा
वीरेंद्र ठाकुर को अपने ऊपर हमले की आशंका थी। इसलिए उसने जनवरी में ही निजी सुरक्षा एजेंसी से चार सुरक्षाकर्मी ले रखे थे। जो 24 घंटे उसके साथ चलते थे। शनिवार को वीरेंद्र के घर पर तीन ही सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। जो वारदात के बाद से ही गायब बताए जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक हमलावर नकाबपोश थे। शुरूआती पड़ताल में सामने आया कि बदमाशों ने सुरक्षाकर्मियों, बच्चों को कमरे में बंद कर दिया। लेकिन वारदात के बाद से एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं मिला है। इस बिंदु पर पड़ताल की जा रही है।

किलाबंद घर, सीसीटीवी कैमरे से लैस
वीरेंद्र तीन साल पहले हुए हमले के बाद से खुद की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हो गया था। उसने पूरे घर को एक किला नुमा बनवा लिया। घर के दरवाजे और दीवारों में जगह तक नहीं छोड़ी। वहीं चारदीवारी पर कंटीले कील लगवा रखे थे। ताकि कोई अंदर न दाखिल हो सके। घर के अंदर से लेकर बाहर तक हर तरफ सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछा रखा था। वह लगातार अपने कमरे में बैठकर खुद ही कैमरों में आने जाने वालों पर नजर रखता था।

बिना आदेश के नहीं खुलता था दरवाजा
पुलिस के मुताबिक पड़ताल में सामने आया कि सुरक्षाकर्मी बिना वीरेंद्र की अनुमति के दरवाजा नहीं खोलते थे। वह सिर्फ अपने करीबी परिचितों को ही अक्सर घर के अंदर आने की अनुमति देता था। बाकी लोगों से काम पूछ कर दरवाजे से ही वापस भेज देता था। यहां तक की मोहल्ले में किसी से नहीं मिलता था। दूसरी पत्नी खुशबू ने पुलिस को बताया कि वीरेंद्र सिर्फ दीवाली में ही घर से निकलता था। इसके अलावा किसी विशेष जरूरत पर ही वह घर से निकलता था। उसके साथ हर वक्त सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते थे।

बिहार में दर्ज है कई मुकदमे
एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक वीरेंद्र ठाकुर पर बेतिया जिले में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने बेतिया एसएसपी से संपर्क किया है। वीरेंद्र के आपराधिक इतिहास की जानकारी मांगी है। शुरूआती बातचीत में छह से सात मुकदमे दर्ज होने के की बात सामने आई है। फिलहाल आपराधिक इतिहास की जानकारी मिलने पर आगे की विवेचना की जाएगी।

बिहार से लखनऊ तक खंगाली जा रही वजह
हत्या के बाद से पुलिस ने हर पहलुओं पर पड़ताल शुरू कर दिया है। पुलिस की एक टीम जहां बिहार से जुड़े मामलों की डिटेल खंगाल रही है। तो एक टीम वीरेंद्र ठाकुर के लखनऊ से जुड़े हर संभावित लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। पुलिस के मुताबिक बिहार के पुरानी रंजिश में हत्या होने की ज्यादा संभावनाएं हैं। वहीं लखनऊ में रेलवे के ठेकेदार का विवाद भी हत्या का कारण हो सकता है। वहीं पहली पत्नी के विवाद की भी जांच की जा रही है।

वारदात के बाद अचानक भागे सुरक्षाकर्मी भी संदेह के घेरे में
एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक वारदात के बाद जब पुलिस पहुंची तो वहां सुरक्षाकर्मियों के बारे में जानकारी मिली। पत्नी ने बताया कि गोली चलने के बाद ही तीनों सुरक्षाकर्मी वहां से अपना सारा सामान लेकर निकल गए हैं। कहा कि हमारी जान को खतरा है। हम यहां नहीं रूक सकते हैं। पुलिस सुरक्षाकर्मियों की भी कुंडली खंगाल रही है।

सीसीटीवी कैमरे में दिखे चार संदिग्ध
वारदात के बाद पुलिस ने आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी। जिसमें चार बदमाश दिखे। फुटेज में दो वर्दी पहने हैं। जबकि दो सादे ड्रेस में हैं। एक ने हरे रंग की कैप लगा रखी है। पुलिस ने जब आसपास के लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि चार पहिया वाहन से बदमाश आए थे। सड़क पर गाड़ी खड़ी कर वीरेंद्र के घर तक पैदल गए थे। फिर वारदात के बाद वापस उसी गाड़ी से वापस चले गए।

13 साल से लखनऊ में बनाया था ठिकाना
बिहार के बेतिया में आपराधिक वारदातों को अंजाम देने वाला वीरेंद्र ठाकुर 13 साल से लखनऊ में ठिकाना बना रखा था। वह खुद की पहचान छिपाने के लिए आसपास के लोगों से भी नहीं मिलता था। यहां तक कि बच्चे मोहल्ले में होली और दीवाली पर लोगों से मिलने जाते थे, लेकिन वीरेंद् घर से नहीं निकलता था। ऐसे में उसके इस ठिकाने का पता हमलावरों को कैसे लगा। यह सवालों के घेरे में है।

बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया के रहने वाले वीरेंद्र ठाकुर की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। उनको सिर में दो गोली लगी है। हमलावर घर के अंदर दाखिल हुए। इसके बाद बच्चों को कमरे में बंद कर दिया। फिर वीरेंद्र की हत्या कर दी। पुलिस हर बिंदुओं पर जांच कर रही है। जल्द ही वारदात का खुलासा कर दिया जाएगा। -डीके ठाकुर, पुलिस कमिश्नर लखनऊ ।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें