प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अजय सिंह व उसका बेटा अंकित पूरी तैयारी से आए थे। उनके पास बांका के अलावा तमंचे भी थे। ग्रामीणों ने प्रताप सिंह की बाग से गोलियां चलने की आवाजें भी सुनी थीं। हालांकि, देर रात तक मृतकों में से किसी को भी गोली लगने की बात सामने नहीं आई थी।
जब अजय ने पुलिस को माता-पिता समेत छह लोगों की हत्या की जानकारी दी तो पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। उसे तुरंत हिरासत में लेकर इंस्पेक्टर ने आला अधिकारियों को वारदात की सूचना दी। पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था नवीन अरोड़ा समेत अन्य अफसरों ने मौके पर पहुंचकर अजय से पूछताछ की।
पुलिस ने अंकित तक पहुंचने के लिए उसकी मां व अन्य परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। हालांकि, देर रात अंकित ने भी थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं, आरोपी अजय का अपने पिता व परिवार के अन्य सदस्यों से रिश्ता काफी खराब था। ग्रामीणों ने बताया कि वह लगभग 20 साल से माता-पिता से अलग रह रहा था।
भाई को ज्यादा चाहते थे पिता, इसलिए थी नफरत
पुलिस उपायुक्त मध्य दिनेश सिंह ने बताया कि आरोपी अजय विकृत मानसिकता का है। उसे लगता था कि पिता छोटे भाई को ज्यादा चाहते हैं। पिता ने पूरी संपत्ति भी छोटे बेटे को ही दे दी थी। पूछताछ में अजय ने बताया कि पिता उसे पसंद नहीं करते थे। इसलिए वह उनसे नफरत करता था।