समिति ने कहा है कि पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों व अन्य व्यक्तियों को आर्थिक लाभ हुआ। इसमें इनकी मिलीभगत स्पष्ट है। उन्हें हुए आर्थिक लाभ के खुलासे के लिए विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराए जाने की आवश्यकता है। समिति की संस्तुति के आधार पर शासन ने विजिलेंस जांच के निर्देश जारी किए। इस प्रकरण में नोएडा प्राधिकरण के संलिप्त पाए गए अधिकारियों, सुपरटेक लिमिटेड के 4 निदेशकों और दो वास्तुविदों के विरुद्ध सतर्कता अधिष्ठान में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
सक्षम न्यायालय में भी होगा मुकदमा
सुप्रीम कोर्ट की अपेक्षा के अनुसार, उप्र. औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम-1976 और उप्र. अपार्टमेंट (प्रमोशन ऑफ कंस्ट्रक्शन, ओनरशिप एंड मेंटिनेंस) अधिनियम-2010 के प्रावधानों के उल्लंघन के मद्देनजर नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक लिमिटेड के संलिप्त पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध सक्षम न्यायालय में मुकदमा दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
समिति ने अपनी आख्या में दो वास्तुविद संस्थानों को चिह्नित करते हुए उनके वास्तुविदों की संलिप्तता भी बताई है। इसलिए शासन ने इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर को प्रकरण भेजने के निर्देश दे दिए हैं।
ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण में 15 दिन के भीतर होगी कार्रवाई
रिपोर्ट ने यह भी कहा है कि सुपरटेक लिमिटेड ने ले-आउट प्लान में आरक्षित ग्रीन बेल्ट को भूखंड में शामिल कर अतिक्रमण कर लिया। इसका कुल क्षेत्रफल सात हजार वर्ग मीटर है। इस संबंध में दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राधिकरण स्तर से भी कार्रवाई चल रही है। शासन ने ग्रीन बेल्ट को अतिक्रमण से मुक्त कराने और चिह्नित अधिकारियों के विरुद्ध अगले 15 दिन में कार्रवाई सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।