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अब लोहिया संस्थान में भी इलाज के लिए कोविड जांच जरूरी, सुपर स्पेशियलिटी में 50 और सामान्य ओपीडी में देखे जाएंगे सिर्फ 100 मरीज

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कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की वजह से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज कराना आसान नहीं होगा। लोहिया संस्थान ने एक अप्रैल से अपने यहां ओपीडी में बिना आरटीपीसीआर जांच इलाज पर रोक लगाने की घोषणा की है। ओपीडी में सिर्फ उन्हीं मरीजों को देखा जाएगा जिनके पास कोविड जांच की निगेटिव रिपोर्ट होगी। 48 से 72 घंटे पहले तक की रिपोर्ट ही मान्य होगी। हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इसके साथ ही सुपर स्पेशियलिटी में रोजाना 50 व जनरल ओपीडी में प्रतिदिन 100 मरीजों ही देखे जाएंगे।
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लोहिया संस्थान के प्रवक्ता डॉ. श्रीकेश सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए नई व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो जाएगी। ओपीडी में मरीज के तीमारदार को भी आने की अनुमति होगी बशर्ते उसके पास भी निगेटिव रिपोर्ट हो। रिपोर्ट के साथ ही दोनों को अपना पहचान पत्र भी लाना अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था के अनुसार सुपर स्पेशियलिटी में रोजाना 25 नए व 25 पुराने तथा जनरल ओपीडी में रोज 50 नए व 50 पुराने मरीज देखे जाएंगे। मरीज अपना पंजीकरण ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरह से करा सकेंगे। निर्धारित संख्या पूरी होते ही रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। इसके साथ ही सभी ओपीडी में कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराया जाएगा तथा सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था भी की जाएगी।
फिलहाल रोज देखे जाते हैं करीब 2500 मरीज
लोहिया संस्थान में एक अप्रैल से मरीजों के लिए काफी मुश्किल होने वाली है। आंकड़ों के अनुसार संस्थान में इस समय प्रतिदिन करीब 2500 मरीज देखे जाते हैं। इनमें करीब 1000 मरीज सुपर स्पेशियल्टी तथा 1500 के करीब सामान्य ओपीडी के होते हैं। यह संख्या नई व्यवस्था के हिसाब से घटकर 150 ही रह जाएगी।
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एक अप्रैल से ओपीडी में मरीजों की संख्या सीमित की जा रही है, जिससे कि डॉक्टरों, स्टाफ व मरीजों को संक्रमण से बचाया जा सके। ओपीडी को पूरी तरह से ऑनलाइन करने की योजना है। नई व्यवस्था एक अप्रैल से लागू होगी।
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- डॉ. श्रीकेश सिंह, प्रवक्ता लोहिया संस्थान
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