लखनऊ। राजधानी में कोरोना से अप्रैल और मई में हुईं मौतों का जो सरकारी आंकड़ा जारी हुआ था, वह अधूरा ही था। अस्पतालों ने संक्रमितों की मौत के बावजूद पोर्टल पर उनका ब्योरा नहीं भरा था। सीएमओ की ओर से कराई गई जांच में इसका खुलासा हो रहा है। कोविड कमांड सेंटर और अस्पताल के रिकॉर्ड से मिलान करने में जो अंतर आ रहा है, उसे अब पोर्टल पर चढ़ाया जा रहा है। लखनऊ में शनिवार को कोरोना से सिर्फ एक मौत हुई। हालांकि, पिछले रिकॉर्ड की 12 मौतें पोर्टल पर नहीं चढ़ पाईं तो शनिवार को 13 मौतें दर्शाई गईं।
अप्रैल और मई में कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें हुईं। इसके बावजूद एक दिन में अधिकतम मौतों की संख्या छह मई को 65 ही रही, जबकि उस वक्त लखनऊ के श्मशान घाटों में रोजाना 300 तक शव जलाए गए। संक्र्रमण कम होने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से कोरोना से होने वाली मौतों का मिलान शुरू किया गया है। अब संक्रमण से होने वाली मौतों की सही संख्या पोर्टल पर दर्ज होगी। बीते चार दिन में जितनी मौतें दिखाई गई हैं, उनमें से 10 से 15 फीसदी ही अभी की हैं। बाकी मौतें पहले की हैं, जिन्हें अब पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।
संक्रमण के 27 नए मामले
राजधानी में शनिवार को कोरोना के 27 नए मामले मिले। इसके साथ 28 लोग स्वस्थ हुए। कोरोना के अब 370 सक्रिय केस रह गए हैं।
दो महीने में 1268 मौतें
कोरोना से लखनऊ में अब तक कुल 2547 मौतें हुई हैं। इनमें से 1268 सिर्फ अप्रैल और मई में ही हुई हैं। मई के महीने में 676 और अप्रैल में 592 मौतें हुईं।
कोट
कोरोना से जितनी मौतें हुईं, उनका रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड होता है। किन्हीं वजहों या व्यस्तता से जो अस्पताल पोर्टल पर मौतों का ब्योरा अपलोड नहीं कर पाए थे, अब उसे कराया जा रहा है।
डॉ. संजय भटनागर, सीएमओ