रोगी से उसका नाम, उम्र, किसी दवा से प्रतिक्रिया, शराब, पान मसाला, सिगरेट आदि की जानकारी ली जाएगी। महिला रोगियों से उनकी गर्भावस्था की जानकारी लेनी होगी। यदि रोगी फॉलोअप में है तो उस पर दवा के प्रभाव व जांच रिपोर्ट की जानकारी ली जाएगी। रोगी से गंभीर रोगों की जानकारी लेनी होगी। इसके बाद उससे वर्तमान स्थिति के बारे में पूछा जाएगा।
यदि उसे जांच की जरूरत होगी तो बताया जाएगा और रिपोर्ट मिलने के बाद फिर से बात करने की सलाह देनी होगी। यदि कोई रोगी विवेकहीन व अस्पष्ट बात करेगा तो उसकी कॉल को टाल दिया जाएगा। रोगियों को सलाह में बताए जाने वाली दवा की तीन श्रेणी तय की गई हैं। साइकोट्रॉपिक्स और शेड्यूल एक्स दवाओं के बारे में सलाह नहीं दी जाएगी।
होम आइसोलेशन के कोविड मरीजों को सलाह देने के लिए प्रत्येक जिले में छह डॉक्टरों की टीम बनाई जाएगी। इसमें एनेस्थेटिस्ट, फिजीशियन व चेस्ट फिजीशियन मुख्य होंगे। ये शिफ्टवार अपने मोबाइल नंबर पर उपलब्ध रहेंगे।
इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) पर कॉल आने के बाद उसे डॉक्टर को ट्रांसफर किया जाएगा। लक्षण के आधार पर मरीज को दवाएं बताई जाएंगी। यदि स्थिति गंभीर है तो मरीज के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था के लिए कमांड सेंटर को बताना होगा।