ओला-उबर टैक्सी चालक राकेश सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन साल से टैक्सी चला रहे हैं। कोरोना काल में ओला-उबर कंपनियां भी कोई मदद नहीं कर रही हैं। न तो गाड़ियों को सैनिटाइज कराया जा रहा है न ही चालकों को मास्क दिए जा रहे हैं। ऐसे में ग्राहक टैक्सी में सफर से कतराएंगे ही।
चालान नहीं रुका तो एसोसिएशन विरोध प्रदर्शन के साथ करेगा घेराव
आरके पांडे ने बताया कि वाहनों के लगातार चालान काटने से भी चालक बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि जब केंद्रीय परिवहन विभाग की ओर से टैक्सी से जुड़े कागजों की वैलिडिटी बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई है तो ऐसे में रिन्यूअल वगैरह को लेकर चालान काटना दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर इसे रोका नहीं गया तो एसोसिएशन के बैनर तले चालक विरोध-प्रदर्शन व घेराव करेंगे।
ओला-उबर चालक पिछले तीन माह से लॉकडाउन के चलते बेरोजगार थे। अब जब टैक्सी को अनुमति मिल गई है तो उन्हें यात्री नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उनके लिए रोड टैक्स, फिटनेस के भी पैसों का संकट खड़ा हो गया है। चालकों की मांग है कि सरकार उनका रोड टैक्स माफ करें।
ऑटो में तीन सवारी, टैक्सी में सिर्फ दो की अनुमति
एसोसिएशन अध्यक्ष आरके पांडे ने बताया कि सरकार ने कोरोना के चलते ऑटो में तीन सवारी और टेंपो में छह सवारी बैठाने की अनुमति दी है। वहीं दूसरी तरफ टैक्सी में सिर्फ दो यात्रियों की अनुमति दी गई। यह भेदभाव नहीं तो और क्या है?