रिपोर्ट बताती है कि 64 फीसदी कॉलर ऐसे हैं जिन्होंने शिक्षा व करियर को लेकर पहले कभी चिंता नहीं की। कोविड के चलते पहली बार लोगों ने शिक्षा, करियर और भविष्य की चिंता करनी शुरू की है। युवाओं ने काउंसलर से स्वीकारा कि पहली बार वे इतनी गहराई से चिंतन कर रहे हैं। सिर्फ 28 फीसदी लोगों ने बताया कि ये समस्याएं कोई नई नहीं हैं, बल्कि कोविड से पहले भी थीं। शेष लोगों का मानना था कि ये आगे भी बनी रहेंगी।
विवाहित युवाओं की चिंता रोजगार
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि युवकों में रोजगार की चिंता ज्यादा दिखी। फोन करके रोजगार की चिंता जताने वाले व हल पूछने वालों में 75 फीसदी युवक हैं, जबकि युवतियों का प्रतिशत महज 25 है। इसी तरह पढ़ाई की चिंता लड़कियों को ज्यादा है। लड़कों की तुलना में लड़कियों के फोन ज्यादा आए। यह प्रतिशत 54 और 46 हैं। अंशुमालि शर्मा कहते हैं कि कॉलर में 50 फीसदी युवक विवाहित हैं। इनके सामने परिवार का भरण-पोषण बड़ी समस्या है।
ग्रामीणों तक पहुंचा तनाव
यह रिपोर्ट करीब 1200 कॉल्स और उनकी काउंसलिंग पर आधारित है। आमतौर पर कहा जाता था कि शहरी जीवन के तनाव से ग्रामीण अभी दूर हैं। यह चिंताजनक है कि कोविड के चलते तनाव की लहर ग्रामीणों तक पहुंच चुकी है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, फोन करने वालों में 49 फीसदी ग्रामीण हैं। वे भी आर्थिक स्थिति को लेकर जबर्दस्त तनाव में हैं। कुल कॉलर्स में 57 फीसदी युवक और 43 फीसदी युवतियां हैं। इसमें स्नातक युवाओं का प्रतिशत 47 है।
आंकड़ों में जानिए : किस समस्या को लेकर सबसे ज्यादा आए फोन
- 37 फीसदी शिक्षा की समस्या
- 14 फीसदी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी
- 12 फीसदी आर्थिक समस्या
- 12 फीसदी परिवार के मुद्दे
- 10 फीसदी शारीरिक स्वास्थ्य
- 7 फीसदी रोजगार
- 4 फीसदी भोजन से संबंधित
कोविड-19 ने आज और कल को लेकर लोगों में तनाव व अवसाद को बढ़ा दिया है। प्रदेश के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में मुस्कुराएगा इंडिया अभियान शुरू किया गया। इसका मकसद स्टूडेंट्स और आम लोगों की काउंसलिंग कर उनके तनाव को दूर या कम करना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना है। - अंशुमालि शर्मा, विशेष कार्याधिकारी व राज्य संपर्क अधिकारी एनएसएस उच्च शिक्षा विभाग, उप्र. शासन
काउंसलर लगातार स्टूडेंट्स के संपर्क में
बहुत ही कम समय में एनएसएस ने टेली कॉलिंग सिस्टम विकसित किया। प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों को काउंसलर नियुक्त किया गया। काउंसलर लगातार स्टूडेंट्स के संपर्क में हैं। युवाओं के बड़ी संख्या में फोन आ रहे हैं और उनके तनाव का कम करने के लिए प्रयास जारी है। - भाई शैली, कम्युनिकेशन फार डवलपमेंट स्पेशलिस्ट, यूनिसेफ